नई दिल्ली 12 मई। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें तमिलनाडु के पूर्व बिजली मंत्री वी. सेथिल बालाजी के कार्यकाल के दौरान 2021 से 2023 के बीच किए गए ट्रांसफार्मर खरीद में कथित तौर पर 397 करोड़ रुपए की अनियमितताओं की सीबीआई जांच का दिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉपोर्रेशन के वित्तीय नियंत्रक वी कासी द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान टैंगेडको के अधिकारी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थं दवे ने तर्क दिया कि मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष सीबीआई जांच की मांग करते हुए कोई विशिष्ट अपील नहीं की गई थी, और उन्होंने दावा किया कि कार्यवाही राजनीतिक रूप से प्रेरित थी। दवे ने कहा, हाईकोर्ट के समक्ष सीबीआई जांच की कोई अर्जी नहीं थी। यह राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला है। हालांकि, जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने टिप्पणी की कि यदि परिस्थितियां ऐसी आवश्यक हों तो संवैधानिक न्यायालय को स्वतंत्र जांच का निर्देश देने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, हमें किसी अर्जी की जरूरत नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि अदालत क्या सोचती है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा, हम विशेष अनुमति याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जांच स्वतंत्र रूप से आगे बढ़नी चाहिए और सीबीआई जांच का निर्देश देते समय मद्रास हाई कोर्ट द्वारा की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, जांच हाईकोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
मद्रास हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल के अपने आदेश में सीबीआई को 2021 और 2023 के बीच लगभग 45,000 वितरण ट्रांसफार्मरों की खरीद में कथित अनियमितताओं की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने तमिलनाडु सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय को मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड सीबीआई को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया था।

