वर्तमान समय में पूरे देश में सीबीएसई आईसीएसई या प्रदेश के बोर्ड द्वारा संचालित स्कूल बच्चों के अभिभावकों को खुश करने और छात्रों को प्रवेश दिलाने के लिए आकर्षित करने व झूठी वाहवाही लूटने के लिए जो प्रयास कर रहे हैं उनसे कोई अनभिज्ञ नहीं है। सब जानते हैं कि मीडिया में अंकों के आधार पर अपने स्कूलों का महिमामंडन करने वाले स्कूल प्रतिभाशाली बच्चों व उनमें भी ६० प्रतिशत से ज्यादा नंबर लाने वाले बच्चों को ही अपने यहां प्रवेश देते हैं। ऐसे में टीचरों का कोई बहुत बड़ा योगदान नहीं कह सकते। स्कूल का नाम हो जाने पर नेताओं व अफसरों को अपने यहां बुलाकर अपनी तारीफ को मीडिया में प्रचारित कराकर कई सुविधाएं शासन प्रशासन से लेने का यह मौका नहीं चूकते हैं।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा बीते दिवस परीक्षा पे चर्चा व छात्रों से मुलाकात कर कहा गया कि अभिभावक अंकों के पीछे ना भागकर खुद को जीवन की कसौटी पर कसने का मौका बच्चों को देने तथा उनकी रुचि का ध्यान देने की सलाह माता पिता को दी गई। पीएम का कहना है कि उनकी क्षमता व रुचि के अनुसार काबिलियत विकसित होने दे। पीएम ने कहा कि शिक्षा बोझ नहीं लगनी चाहिए। इसमें हमारी पूरी भागीदार की सोच होती है। मन को वश में करें फिर मन को जोड़ें और उन विषयों को जोड़ें इनका आपको अध्ययन करना है। उन्होंने छात्रों को आगे बढ़ने के कई गुरुमंत्र भी दिए। उन्होंने कहा कि जिंदगी को बेहतर बनाने पर ध्यान दे। परीक्षा को उत्सव बनाओ। खुद से प्रतियोगिता करो। एक्जाम को बेरियर बनाओ रटटू तोता नहीं। अपने आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम से जो तथ्य उभरकर आए मुझे लगता है कि अभिभावकों को इन पर अमल करना चाहिए और ऊंची बिल्डिगों के एसी कमरों को देखकर विभिन्न नामों पर फीस देने की बजाय यूपी के एक डीएम द्वारा अपनी बच्ची को आंगनवाड़ी में प्रवेश कराने के लिए स्कूलों की भव्यता नहीं बच्चों से तालमेल रखने केलिए बच्चों को प्रवेश दिलाएं। पीएम मोदी के इस गुरुमंत्र को हम आत्मसात कर कि अंकों के पीछे नहीं भागना है सफलता के लिए मेहनत करनी है।
पीएम ने छात्रों को यह सीख दीं
लक्ष्य पहुंच के अंदर होने चाहिए लेकिन आसानी से हासिल होने वाले नहीं, लक्ष्य बनाएं और काम करें।
पढ़ाई, स्किल्स, आराम और हॉबीज में संतुलन ही विकास की कुंजी है ।
बनने की नहीं, बल्कि करने की इच्छा रखें।
मिलकर सीखना सभी को बेहतर बनाने में मदद करता है।
हले स्कूली पढ़ाई पर ध्यान दें। प्रतियोगी परीक्षाएं उसके साथ या बाद में हो जाएगी।
परीक्षाएं त्योहारों की तरह हैं, उन्हें मनाएं।
कंफर्ट जोन जीवन को आकार नहीं देते बल्कि आपका जीने का तरीका उसे आकार देता है।
शिक्षकों और अभिभावकों को भी दिए सुझाव
शिक्षकों कोरू छात्रों में जिज्ञासा पैदा करने और समझ बेहतर बनाने के लिए उन्हें पहले से जानकारी दें।
माता-पिता कोरू वे बच्चों को उनकी क्षमता, योग्यता और रुचि के अनुसार खिलने दें।
कुछ दशक पहले एक समाचार पढ़ा था कि जिन विषयों में स्कूलों ने छात्र को एडमिशन नहीं दिया उस विषय पर छात्र को अंतररराष्ट्रीय पुरस्कार मिला। देश के एक क्रिकेट खिलाड़ी को जिस स्कूल ने प्रवेश देने से मना किया कुछ समय बाद उसे अपने यहां मुख्य अतिथि बनाया था। कुछ छात्र जो असफल होते गए कुछ समय बाद वो अपनी कामयाबी का परचम फहराने और देश दुनिया में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे। इसलिए स्कूल कोई सा भी हो छात्रों को मिले अंक या स्कूल की भव्यता देखकर प्रवेश ना ले और पढ़ाई की संतुष्टि की सोच रखने वाले स्कूलों में जाएं। अंकों की मारामारी कितने ही छात्रों को आत्महत्या के लिए उकसाकर उनकी जान ले चुकी है। छात्रों को डंांटने की बजाय उसे प्यार से बैठकर पढ़कर पढ़ाएं। इसी से उसके भविष्य और अभिभावकों की उम्मीदों की पूर्ति हो पाएगी।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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