नई दिल्ली 24 अप्रैल। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को आजीवन कारावास के आदेश पर रोक लगाकर अंतरिम राहत दी है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या के मामले में जोगी को यह सजा सुनाई थी।
उच्च न्यायालय ने छह अप्रैल को सुनाए फैसले में जोगी को दोषी ठहराया था और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने को कहा था। आदेश के विरुद्ध जोगी की ओर से शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई थी। उन्होंने आत्मसमर्पण करने की समयसीमा से भी छूट का अनुरोध किया था। गुरुवार को जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष जोगी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं विवेक तन्खा और कपिल सिब्बल ने दलीलें दीं। पीड़ित परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं सिद्धार्थ लूथरा और गोपाल शंकरनारायणन ने इसका विरोध किया। सुनवाई के बाद अदालत ने जोगी को आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगा दी। शीर्ष कोर्ट ने मामले में सीबीआई को भी नोटिस जारी किया है।
यह है पूरा मामला
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तत्कालीन नेता रामअवतार जग्गी की चार जून 2003 को रायपुर के मौदहापारा पुलिस थाने के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अमित जोगी सहित 29 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। निचली अदालत ने पहले अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
अमित जोगी ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। वहीं, गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश पर स्टे (रोक) लगा दिया है। जिसमें अमित जोगी को दोषी ठहराया गया था। इस राहत के बाद अमित जोगी की गिरफ्तारी और सजा की कार्रवाई पर फिलहाल विराम लग गया है।
जोगी पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि, उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, जिसे संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश जारी किया है। प्रदेश की राजनीति में इस फैसले के दूरगामी परिणाम देखे जा रहे हैं। अमित जोगी के समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं विपक्षी दल अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा हैं।

