मुंबई, 02 मई (ता)। फिल्ममेकिंग के बिजनेस में समय पर सर्टिफिकेशन हमेशा से बेहद अहम माना गया है। प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए छोटी सी देरी भी मार्केटिंग प्लान, थिएटर बुकिंग और पूरी रिलीज रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। पिछले कुछ हफ्तों में इंडस्ट्री सर्कल्स में आख़री सवाल को लेकर चर्चा तेज रही है। यह फिल्म सिर्फ अपने विषय की वजह से नहीं, बल्कि सर्टिफिकेशन प्रोसेस में लग रहे समय को लेकर भी सुर्खियों में है। देरी को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इस स्थिति ने एक बार फिर तय समयसीमा की अहमियत को उजागर किया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि स्क्रीनिंग के 72 घंटे बाद भी ब्ठथ्ब् की तरफ से कोई जवाब क्यों नहीं आया? नियमों के मुताबिक तीन कार्य दिवस के भीतर प्रतिक्रिया देनी होती है, लेकिन चार दिन से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अगर स्थिति साफ नहीं है, तो यह प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी रिलीज माहौल में अनिश्चितता सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। एक डिस्ट्रीब्यूशन कंसल्टेंट के मुताबिक, “फिल्मों की प्लानिंग महीनों पहले होती है। कुछ दिनों की देरी भी प्रमोशनल मोमेंटम और बॉक्स ऑफिस क्षमता पर असर डाल सकती है।”
इन चुनौतियों के बावजूद आख़री सवाल को लेकर बज़ लगातार बढ़ रहा है, जिसकी बड़ी वजह दर्शकों की जिज्ञासा और इसके टीज़र को मिला मजबूत रिस्पॉन्स है।
यह पूरा मामला इंडस्ट्री की एक बड़ी जरूरत को सामने लाता है ऐसा सर्टिफिकेशन प्रोसेस जो गहन जांच और समय पर फैसले, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखे, ताकि रचनात्मक अभिव्यक्ति और बिजनेस की जरूरतों का सम्मान हो सके। अब चर्चा सिर्फ देरी की नहीं, बल्कि निष्पक्षता की भी है। क्या सेंसर बोर्ड सच में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है, या कहीं न कहीं पक्षपात की गुंजाइश है? ’इस सवाल का जवाब कौन देगा?’ फिल्म के अगले अपडेट का इंतजार जारी है, और पूरी इंडस्ट्री इस मामले पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि ऐसे उदाहरण अक्सर भविष्य के लिए मिसाल बन जाते हैं।
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