सामाजिक जागरुकता कहें या नियमों का लाभ पात्रों को दिलाने अथवा जानकारी दिलाने किसी ना किसी मुददें को लेकर घर जाकर जानकारी लेने का काम साल में हमेशा ही होता दिखाई दिया। कभी मतदाता सूची तो कभी बीमारियों का निरीक्षण होना है। वर्तमान में जनगणना चल रही है। बीते दिनों तक स्वगणना की व्यवस्था थी जो अब घर घर जाकर सरकारी कर्मचारियों को करनी पड़ रही है।
किसी भी प्रकार की गणना को गलत तो नहीं कह सकते क्योंकि जब यह शुरु होती है तो विरोध के बाद भी रुकती नहीं है। इसलिए कहा जा सकता है कि आवश्यक होने के कारण यह पूर्ण होती है। मेरा मानना है कि यह कार्य जब जब शुरु होता है सरकारी कार्यालयों में आम आदमी से संबंध ज्यादातर कार्य प्रभावित होने लगते हैं क्योंकि जिनकी डयूटी लगती है वो अन्य भी जनगणना के नाम से कार्यालय से गायब रहते हैं। जनगणना जरुर होनी चाहिए लेकिन इसकी शुरुआत की पद्धति लागू रहे और आम आदमी को सोशल मीडिया के माध्यम से जागरुक कर प्रोत्साहित किया जाए वो अपने परिवार की गणना कर साइट पर डाले। तो यह ठीक है वरना इस भीषण गर्मी के दौर और उससे ब ड़ी बात है कि शिक्षकों को इसमें लगाने से पढ़ाई प्रभावित होती है और अन्य कर्मचारियों को इसमें लगाने से काम प्रभावित होते हैं। सरकार जनता की समस्याएं दूर करने का अभियान चला रही है तो यह दोनों एक साथ सफलता से नहीं चला सकते। अगर जनगणना का सही निस्तारण के लिए सरकार इसके लिए एक अलग विभाग बनाए या जिस प्रकार सेना में अग्निवीरों की कुछ समय के लिए भर्ती की उस तरीके से इस काम के शिक्षित बेरोजगारों को नियुक्त कर यह कार्य किया जाए तो गणना भी होगी और आम आदमी की समस्या भी दूर होगी। जिस प्रकार अब अग्निवीरों को कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्राथमिकता दी जा रही है वही बात जनगणना करने वालों पर लागू होगी क्येांकि वह घर घर जाएंगे तो एक विचारधारा लागू होगी और जब इनका कार्यकाल खत्म होगा तो यह अपना परिवार का पालन आसानी से कर सकते और इनकी जानकारियों का लाभ उठाकर सुरक्षा बलों में अग्निवीरों को मौका मिल रहा है जनगणना का काम करने वालों कोभी भविष्य में ऐसे लाभ मिल सकते हैँ और सरकार का बेरोजगारी से जूझने का जो प्रयास चल रहा है उसमें भी राहत मिलेगी। जिसे ग्रामीण भाषाा में आम के आम गुठलियों के दाम कहा जा सकता है। इसलिए कांवड़ यात्रा जनगणना जैसे कार्यों के लिए एक नया विभाग सरकार बनाएं और कुछ लोगों को स्थायी तैनात कर अस्थायी कर्मचारियों से यह कार्य कराया जाए तो ही इस समस्या का समाधान हो सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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