खतौली 03 फरवरी। कस्बे के प्रतिष्ठित लाल दयाल पब्लिक स्कूल से जुड़े बहुचर्चित जानलेवा हमले के मामले ने एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है। स्कूल के उपप्रबंधक राजवीर सिंह वर्मा उर्फ टीटू पर हुए हमले के मुख्य आरोपी और पीटीआई आशीष चौधरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। मौत की खबर से न केवल क्षेत्र में सनसनी फैल गई है, बल्कि उन तमाम सवालों को फिर से जीवित कर दिया है जो स्कूल के विवाद के साथ लंबे समय से जुड़े हुए थे।
मूल रूप से खतौली के ताजपुर गांव का निवासी आशीष चौधरी पुत्र हरेंद्र सिंह सोमवार को दिल्ली-देहरादून हाईवे पर दौराला क्षेत्र के वलीदपुर कट के पास गन्ने के खेत में अचेत अवस्था में मिला था। उसकी ऑल्टो कार भी वहीं पास में खड़ी थी। उसे उपचार के लिए मेरठ के आर्यावर्त अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार मामला प्रथम दृष्टया जहरीले पदार्थ के सेवन का लग रहा है। हालांकि, पुलिस के लिए सबसे बड़ी पहेली उसकी जेब से बरामद वह ढाई पन्ने का सुसाइड नोट है, जो अब जांच का केंद्र बन गया है।
यह घटना इसलिए भी अत्यंत चर्चा में है क्योंकि आशीष की मौत जिस आर्यावर्त अस्पताल में हुई, उसके संचालक डॉक्टर मलय शर्मा हैं। गौरतलब है कि स्कूल विवाद में नामजद मुख्य आरोपी और पूर्व प्रधानाचार्या डॉक्टर ममता दत्त शर्मा, डॉक्टर मलय शर्मा की सगी साली हैं। स्कूल के उपप्रबंधक राजवीर सिंह वर्मा उर्फ टीटू ने पूर्व में कई बार मुख्यमंत्री और डीजीपी आदि को भेजे शिकायती पत्रों में यह लिखित आरोप लगाए हैं कि डॉक्टर मलय शर्मा और डॉक्टर ममता दत्त शर्मा मिलकर स्कूल पर कब्जा करने के उद्देश्य से उनकी हत्या की साजिश रच रहे थे। आशीष की मौत के बाद राजवीर सिंह वर्मा के पुराने आरोप एक बार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं।
हमले की पृष्ठभूमि और कानूनी पेच
पूरा मामला 19 मई 2025 का है, जब स्कूल परिसर में राजवीर सिंह वर्मा पर जानलेवा हमला हुआ था। स्कूल चेयरमैन कर्मवीर सिंह की तहरीर पर तत्कालीन प्रधानाचार्या ममता दत्त शर्मा, पीटीआई आशीष चौधरी समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस ने इस मामले में अभी नामजद आरोपियों को चार्जशीट भी कर दिया था। यह मामला अदालत में विचाराधीन है। इस बीच मुख्य आरोपी आशीष की मौत ने केस की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के घेरे में कॉल रिकॉर्ड्स और सुसाइड नोट
आशीष की मौत के पीछे व्यक्तिगत तनाव, कानूनी दबाव या कोई बाहरी षड्यंत्र, इन तीनों एंगल पर पुलिस जांच कर रही है। सूत्रों की मानें तो मौत से ठीक पहले आशीष की किसी महिला से फोन पर लंबी बहस हुई थी। पुलिस अब सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और उसमें दर्ज किए गए तथ्यों की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी में है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच हर पहलू को छूएगी ताकि यह साफ हो सके कि क्या यह वाकई आत्महत्या थी या कोई सोची-समझी साजिश।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों पर स्थिति साफ होगी। साथ ही सुसाइड नोट और कॉल डिटेल्स के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

