अहमदाबाद 07 जुलाई। गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 के सीरियल ब्लास्ट मामले में स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने फरवरी 2022 में 38 दोषियों को फांसी और 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
दोषियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। जस्टिस एवाई कोगजे और समीर दवे की बेंच ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) से जुड़े लोगों की सजा को सही ठहराया।
कोर्ट ने सरकार को 56 मृतकों के परिजन को 10-10 लाख रुपए और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया।
दरअसल अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट में कुल 78 आरोपियों पर मुकदमा चला था। 2009 में दर्ज इस मामले में 13 साल तक लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और आखिरकार 18 फरवरी 2022 को फैसला सुनाया गया।
सेशंस कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया, जिनमें से 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सबूतों के अभाव में 29 आरोपियों को बरी कर दिया गया।
राज्य सरकार ने अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट द्वारा 2008 के सीरियल ब्लास्ट केस में 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को लागू करने और उसकी पुष्टि के लिए गुजरात हाई कोर्ट में एक कन्फर्मेशन याचिका दायर की थी।
वहीं सेशंस कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए 48 आरोपियों ने भी अपनी सजा के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। इन दोनों याचिकाओं पर सुनवाई के बाद गुजरात हाई कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाते हुए दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा है।
26 जुलाई 2008 को हुए थे सिलसिलेवार धमाके
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में 20 अलग-अलग जगहों पर 21 सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इसआतंकी हमले में 56 लोगों की जान चली गई और 200 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
शुरुआती जांच में कुल 99 आतंकवादियों को आरोपी माना गया था, जिनमें से 82 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। ये आरोपी अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, भुज के साथ-साथ मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और झारखंड के रहने वाले थे।
कोर्ट में लगभग 6 हजार सबूत पेश किए गए और 1163 गवाहों से पूछताछ की गई। सेशंस कोर्ट ने करीब 7 हजार पन्नों में अपना फैसला सुनाया। केस फाइल 7.88 लाख पन्नों की है।

