उठो जागो तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए का संदेश युवाओं को देने में सफल रहे १२ जनवरी १८६३ को कोलकाता में जन्मे स्वामी विवेकानंद ११ से २७ सितंबर १८९३ के बीच शिकागो में आयोजित धर्म संसद में अपने संबोधन से देश का नाम दुनिया में सम्मानजनक रूप से पहचान बनाने में सफल रहे स्वामी विवेकानंद ३१ मई १८९३ को ओरिएंट कंपनी के पैनिनशुना नामक जहाज से प्रथम श्रेणी के टिकट पर मुंबई से सवार होकर ६३ दिन में शिकागो पहुंचे और वहा उन्होंने अपना संबोधन किया वो इतिहास बन गया और १० मई १८९३ को तीस वर्ष की उम्र में शिकागो जाकर देश का नाम रोशन करने वालों में प्रथम स्थान पर विराजमान स्वामी विवेकानंद अपने जीवन के शुरूआती दौर में पांच नामों से जाने गए। बचपन में उन्हेें नरेन नरेंद्र कमलेश सचिदानंद बीबी दिशानंद और बाद में विवेकानंद जो सबसे ज्यादा चर्चित हुआ। आज पूरी दुनिया में उनके प्रशंसक उनकी जयंती मना रहे हैं। बताते चले कि १९८५ में राजीव गांधी सरकार ने स्वामी विवेकानंद जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित की जिसका उददेश्य देश का युवा वर्ग नौकरियों और व्यक्तिगत सफलता तक सीमित ना रहे और देश व समाज के प्रति उत्तरदायित्व को समझे। स्वामी विवेकानंद के पदचिन्हों पर चलकर परिवार व देश का नाम रोशन करते हुए मजबूत राष्ट्र की कल्पना में अपना सहयोग दें। इस साल राष्ट्रीय युवा दिवस की थीम भी उठो जागो अपनी शक्ति को पहचानों रखी गई है। स्वामी विवेकानंद के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले अजित सिंह से उनकी मित्रता अनुकरणीय रही। जानकारों का मानना है कि स्वामी विवेकानंद के साथ राजा अजित सिंह हर परिस्थिति में खड़े रहे और शिकागो में हिंदू धर्म की पताका फहराकर जब स्वामी विवेकानंद १८९७ को भारत लौटे तो १७ दिसंबर १८९७ को खेतड़ी नरेश ने उनके सम्मान में १२ मील दूर जाकर उनका स्वागत किया और उन्हें खेतड़ी लेकर आए जहां सभी ओहदेदारों ने दो दो सिक्के और राजा ने तीन हजार सिक्के भेंट कर उनके अभियान में योगदान दिया। ४ जुलाई १९०२ को स्वामी विवेकानंद ने कोलकाता के वेलूर मठ में अपनी अंतिम सांस ली। स्वामी विवेकानंद हर भारतीय युवा के लिए प्रेरणास्त्रोत रहे। आज उनकी जयंती पर हम सब मिलकर अपने जीवन में जो उन्होंने हमें संदेश दिए उसे आत्मसात कर देशवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए हर प्रकार का नशा छोड़ने फिजूलखर्ची से बचने बिजली पानी की बर्बादी रोकने का संकल्प लेते हुए यह निर्णय लें कि हम सरकार के हर व्यक्ति को साक्षर बनाने की येाजना के तहत आधुनिक स्कूलों के पीछे भागने के बजाय उन स्कूलों की तरफ जाएं जहां हमें हर प्रेरक संदेश देने वाली शिक्षा उपलब्ध कराई जाती हो। हम स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर शत शत नमन करते हुए उनके प्रेरणास्त्रोत संदेशों को याद करते हुए उनके विचारों को देशहित और जनहित के लिए अपने जीवन में आत्मसात कर आगे बढ़ें।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक खुशबू टाइम्स मेरठ)
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