मेरठ 16 जून (प्र)। मेरठ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए निर्धारित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में कथित फर्जीवाड़े और धन के दुरुपयोग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 13.83 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। मामले में मेरठ की एक निजी विश्वविद्यालय समेत उत्तराखंड की दो विश्वविद्यालय जांच के दायरे में हैं। जांच के दायरे में आए संस्थानों में मदरहुड इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलाजी रुड़की, रुड़की इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट साइंसेज/मेडिकल साइंसेज (आरआईएमइस) हरिद्वार तथा महावीर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी मेरठ शामिल हैं।
यह मामला वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए जारी की गई छात्रवृत्ति राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है।
जांच एजेंसियों के अनुसार पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत जारी धनराशि के वितरण में कथित रूप से फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि पात्र छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति राशि का गलत तरीके से लाभ उठाया गया और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इसी मामले में आर्थिक अनियमितताओं की जांच के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की है।
ईडी के अनुसार, हरिद्वार के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) के माध्यम से इन संस्थानों के 6208 छात्रवृत्ति दावों को स्वीकृत किया गया था, जिसके तहत करीब 27.98 करोड़ रुपये जारी किए गए। इनमें से 19.74 करोड़ रुपये सीधे संस्थानों के खातों में और 8.24 करोड़ रुपये छात्रों के खातों में भेजे गए। जांच में पाया गया कि कुल 6208 दावों में से 2895 दावे पूरी तरह फर्जी थे, जिनकी राशि 13.83 करोड़ रुपये बैठती है।
ED की जांच में इस पूरे घोटाले का एक खास तरीका सामने आया. आरोप है कि कई छात्रों को सिर्फ कागजों पर दाखिला दिखाया गया. कई छात्र कॉलेज में पढ़ाई नहीं कर रहे थे, परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे या फिर यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड में उनका कोई सही विवरण नहीं मिला. जांच के दौरान यूनिवर्सिटी और शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड की जांच में बड़ी गड़बड़ियां मिलीं. कई छात्र ऐसे मिले जो कॉलेज में मौजूद ही नहीं थे, परीक्षा में फेल थे या परीक्षा फॉर्म तक नहीं भरा था, यूनिवर्सिटी में रजिस्टर्ड नहीं थे या फिर ऐसे कोर्स में दिखाए गए जो मान्यता प्राप्त नहीं थे.

