मेरठ 26 जून (दैनिक केसर खुशबू टाइम्स)। आजकल आवास विकास मेडा मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारी अवैध निर्माणकर्ताओं को राहत देने के लिए अवैध निर्माण को शमन और कंपाउड करने के नाम पर कार्रवाई करने से क्यों बच रहे है यह तो वो ही जाने।
इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि अवैध निर्माण शमन और कंपाउंड होने पर पूरी तौर पर रोक लगी हुई है। मगर पुरानी अंग्रेजों के जमाने की धाराऐं जिन्हें सरकार धीरे धीरे समाप्त कर रही है उन्हें लेकर अवैध निर्माणकर्ताओं को बचाने का खेल जारी है। नागरिकों की चर्चा अनुसार कुछ साल पहले माननीय उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैसला देते हुए अवैध निर्माण को शमन व कंपाउंड पर पूरी तौर पर रोक लगाई थी और यह फैसला पूरे देश में लागू होगा। क्योंकि शमन और कंपाउंड अवैध निर्माणों को बढ़ावा देता है। उसके बाद एक खबर पढ़ने को मिली कि उप्र सरकार ने भी माननीय न्यायालय के आदेश को ध्यान में रखकर अवैध निर्माणों के शमन और कंपाउंडों पर रोक लगा दी थी। अब देश में कानून तो एक है कार्रवाई के आधार भी उसी के तहत होते है उसके बावजूद पता नहीं आवास विकास और मेडा के अधिकारी शमन और कंपाउंड का खेल कैसे खेल रहे है।
मजे की बात यह पता चली है कि जिन अवैध निर्माणों को शमन और कंपाउंड किया जाता है उसके अलावा जो निर्माण होता है उसे तोड़ने का शपथ पत्र निर्माणकर्ता देता है लेकिन आजतक कोई ऐसा समाचार नहीं मिला कि किसी ने कंपाउंड के अलावा जो निर्माण हो वो तोड़ा हो। बताते चले कि लखनऊ की घटना के बाद माननीय मुख्यमंत्री ने सख्त रूख अपनाया मगर आज भी मेरठ विकास प्राधिकरण और आवास विकास के अफसर मानचित्र पास बताकर या कंपाउंड व शमन होना बताकर आम आदमी की निगाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। आखिर ऐसा कैसे हो रहा है मंडलायुक्त जी आवास विकास और मेडा के अधिकारियों को बुलाकर इन अवैध निर्माणों के विरूद्ध कार्रवाई कराई जानी चाहिए और दोषी अधिकारियों को सजा भी हाथो हाथ मिले। क्योंकि लखनऊ प्रकरण में 19 इंजीनियरों और 4 पीसीएस अफसरों के विरूद्ध अवैध निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कार्रवाई होना मौखिक सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है।
