जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले कुछ सालों में आम आदमी के बीच चर्चा का विषय रहे हैं क्योंकि जनसमस्याओं के समाधान को लेकर उनके द्वारा आवाज उठाया जाना और हर मामले में विनम्रता के साथ स्पष्ट बोलना उनकी यह खासियत उन्हें आम आदमी के नजदीक ला रही है। वैसे तो जंतर मंतर सहित कहीं ना कहीं पूरे देश में धरने प्रदर्शन होना आम बात है। ध्यान दे तो इस स्थल पर भी काफी समय से धरने चल रहे हैं मगर सोनम वांगचुक का धरना बिल्कुल अलग और नागरिकों के हित में है। इसलिए कहा जा सकता है कि अन्ना हजारे जैसे सोनम वांगचुक का आंदोलन बनता जा रहा है। बताते हैं कि आज १९वें दिन भी उनका धरना जारी रहा। कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके के अलावा फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी, फिल्म अभिनेता अनुराग कश्यप, जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल कर्ण सहित कई लोग उनसे धरना समाप्त करने का आग्रह कर चुके हैं। आज शाम को आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी धरना स्थल पर पहुंचे और सोनम वांगचुक से बात कर धरना समाप्त करने का आग्रह भी किया। जानकारी के अनुसार सोनम वांगचुक बुधवार को अपनी भूख हड़ताल के 18वें दिन भी लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत नहीं करने को लेकर सरकार को क्रूर बताया।
कॉजपा का मेडिकल की प्रवेश परीक्षा श्नीट्य में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन बुधवार को 26वें दिन में प्रवेश कर गया। कॉजपा की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक अभी भी श्श्बहुत कमजोर्य्य हैं और लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
वांगचुक का वजन घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है। पिछले 24 घंटे में उनका वजन 400 ग्राम कम हुआ है। भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से अब तक उनका कुल वजन 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है।
मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, उनका रक्तचाप 105/76, रक्त शर्करा का स्तर 80 एमजीध्डीएल और ऑक्सीजन संतृप्ति 97 प्रतिशत दर्ज की गई। शरीर में पानी का स्तर संतोषजनक बताया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि वह होश में हैं और मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी की आवश्यकता है।
दीपके ने एक्स पर लिखा, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 18वां दिन है। जिस व्यक्ति ने आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए न्याय की मांग को लेकर अपनी जान दांव पर लगाने का फैसला किया, उसे सरकार की ओर से केवल चुप्पी मिली है। सरकार न केवल जवाबदेही से बच रही है, बल्कि वह क्रूर भी है। दीपके ने कहा कि जिन सवालों के जवाब मिलने चाहिए, वे ये हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बातचीत करने से क्यों इनकार कर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अब तक जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया गया है।
उन्होंने कहा, यह पूछने के बजाय कि विपक्ष के नेता ने कॉजपा का समर्थन क्यों नहीं किया या कॉजपा की टीम का हर सदस्य सोनम सर के साथ भूख हड़ताल पर क्यों नहीं बैठा है, उन सवालों को पूछिए जो वास्तव में मायने रखते हैं। कॉजपा ने वांगचुक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में 16 जुलाई को एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल करने की भी घोषणा की। एक अलग मंच पर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) नेता नेहा, मनीष और आमीन ने स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद अपनी भूख हड़ताल जारी रखी। मंगलवार को विभिन्न क्षेत्र की हस्तियों ने वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की थी।
मेरा मानना है कि किसी भी मुददे को लेकर अनशन करने का आश्य यह होता है कि सरकार और जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर आकर्षित हो और वह समझे। इस बात को लेकर आम आदमी नाराज है। विन्रमता से कह रहा हूं कि सोनम वांगचुक जी यह अनशन समाप्त कर दीजिए। आपका मुददा गलत नहीं था और सरकार से जवाबदेही मांगना गलत नहीं है लेकिन जनहित में आगे काम करने के लिए आपका स्वस्थ होना बहुत जरुरी है। महात्मा गांधी देश की आजादी के लिए आंदोलन करते थे। सभ्ीा देशवासी उनके साथ खड़े रहते थे। उन्हें कामयाबी मिली और हम आजाद हुए। आपका आंदोलन अपनी ही सरकार के कार्यों को लेकर है जो आप कर चुके हैं। आप समाजसेवा के कार्यों केलिए समाज की एक धरोहर के समान है मगर किसी भी अहंकारी के लिए अपना जीवन खतरे में डालना गलत है।
मेरा विपक्षी पार्टियों के नेताओं व कांर्ग्रेस सांसद राहुल गांधी, सपा मुखिया अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती से आग्रह है कि वो जिस प्रकार जनहित की बातें उठा रहे हैं और आंदोलन कर रहे हैं उसे ध्यान रख उन्हें जंतर मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त कराने और उनकी आवाज उठाने का वादा करें। सोनम वांगचुक साहसी समझदार और गंभीर व्यक्ति है। उनकी जीवटता युवाओं को संदेश देती है। जितना ६० साल के जीवन में देखा है जब तक आप सामने हैं लोग आपको देख रहे हैं वरना सभी जानते हैं कि देश की आजादी में अपने प्राणों का बलिदान देने वालों को हम कितना याद कर रहे हैं। एक समय था जब रामलीला मैदान में अन्ना हजारे का आंदोलन चर्चा का विषय था लेकिन आज यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि किसी विशेष बात में उनकी चर्चा हो तो अलग है वरना कोई उनका नाम भी नहीं ले रहा। ऐसे में अगर सोनम वांगचुक जैसे जलवायु और समाजसेवी कार्यकर्ता आवाज उठाने में सक्षम नहीं रहेंगे तो इस आंदोलन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा क्योंकि देश में हर घंटे नए मुददे पर चर्चा हो जाती है और किसी भी बात को कुछ दिनों में भूलकर अपने काम में मस्त हो जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रसार भारती बोर्ड के पूर्व सदस्य आईएनएस व इलना से जुड़े रहे वर्तमान में सोशल मीडिया एसोसिएशन के नेशनल चेयरमैन सुनील डांग व मजीठियां बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महामंत्री अंकित बिश्नोई, व ऑल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आईना के चेयरमैन सुरेंद्र शर्मा एडवोकेट ने सोनम वांगचुग से अपना अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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