देश की आजादी के बाद से पिछले ५० साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की जो मांग यूपी के पहले सीएम संपूर्णानंद जी की सिफारिश के बाद शुरू हुई वो अब चरम पर पहुंच रही है। ऐसा लगता है कि देर सबेर बेंच की स्थापना अब हो जाएगी। क्योंकि कुछ साल पूर्व महाराष्ट्र में ऐसी मांग जनता की पूरी की गई है। सत्ताधारी दल के बड़े नेता भी इस मांग को उठा रहे हैं। विपक्ष भी पूरी तौर पर साथ दे रहा है। गत १७ दिसंबर को इस मांग को लेकर संघर्ष समिति के चेयरमैन संजय शर्मा एडवोकेट और महामंत्री राजेंद्र राणा, मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र सिंह धामा आदि के प्रयासों से बंद सफल रहा। जिस प्रकार आम आदमी ने इसमे भूमिका निभाई उससे लगा कि यह मांग अब जन आंदोलन बन गई है। इस मांग को पूरा कराने के लिए अनेक प्रकार से अपना समर्थन देने और सिफारिश करने के मामले में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, स्व इंदिरा गांधी और यूपी के पूर्व सीएम एनडी तिवारी, रामनरेश, मायावती और मुलायम सिंह व अखिलेश यादव के नाम की चर्चा खूब होती है। लेकिन पूर्व पीएम स्व. चौधरी चरण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी व रालोद सांसद डॉ राजकुमार सांगवान बिजनौर सांसद चंदन चौहान वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग का समर्थन करते रहे हैं लेकिन पता नहीं क्या कारण है कि जब भी आंदोलन जोर पकड़ता है तो अन्य दलों के नेताओं के नाम खूब लिए जाते हैं लेकिन रालोद नेताओ के प्रयासों और उनके द्वारा संसद में भी मांग उठाई जाती रही है उसके बावजूद रालोद नेताओं का नाम कोई क्यों नहीं लेता यह बात समझ से बाहर है। स्व चौधरी चरण सिंह मेरठ में वकालत करते थे वो चाहते थे कि हाईकोर्ट बेंच की स्थापना हो और उनके दल के नेता भी पूरी कोशिश करते रहे हैं इसके बाद भी रालोद के प्रयासों की चर्चा ना किया जाना सही नहीं कहा जा सकता। चरण सिंह से लेकर जयंत चौधरी तक मधुर संबंध रखने वाले मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह धामा और इस आंदोलन के मुखिया संजय शर्मा व राजेंद्र राणा से आग्रह है कि वह रालोद के नेताओं के प्रयासों को प्राथमिकता से जनता के सामने लाएं। बेंच तो आनी है और आकर रहेगी मगर चौधरी चरण सिंह जैसे नेताओं के प्रयासों को नजरअंदाज ना करें।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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