जीत की खुशी चाहे वह किसी भी क्षेत्र में क्यों ना मिली हो आत्मा को शांत कर परमात्मा का आभार व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती है। यह भी पक्का है कि हर बार कोई भी अपनी जीत का आंकड़ा कायम नहीं रख सकता। मगर जब भी यह मिलती है हौंसला प्रभाव और सम्मान बढ़ाने में कोई कमी नहीं रखती। वर्तमान में बीते दिवस इंग्लैंड को सौ रन से हराकर छठी बार अंडर-19 का विश्वकप भारत ने १४ साल के वैभव सूर्यवंशी द्वारा बनाए गए १७५ रनों से जीतने में सफलता पाई। जो इस बात का प्रतीक है कि १४ वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भविष्य का सिरमौर खिलाड़ी होने की संभावनाओं पर खरा उतर सकता है। ८० गेंदों पर १५ चौके व १५ छक्कों की मदद से १७५ रन बनाने पर
पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें इस टीम पर गर्व है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण खेल दिखाया। यह जीत युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। सारा देश वैभव सूर्यवंशी की प्रशंसा कर रहा है। मीडिया में वह छाए हुए हैं। भगवान करे उनकी मेहनत के दम पर उन्हें ऐसी जीत मिलती रहे लेकिन एक बात यह भी है कि दिन के बाद रात भी होती है इसे ध्यान रखते हुए खेल प्रेमियों को जब किसी भी कारण से हमारे खिलाड़ी सफल नहीं होते हैं तो उनकी आलोचना करने की बजाय उन्हें प्रोत्साहन देने व आगे बढ़कर सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना सबसे बड़ी जरुरत होती है। जैसे व्यापार में हमेशा कामयाबी नहीं मिलती लेकिन लोग गिरकर उठते हैं और सफलता का परचम फहराते हैं। ऐेसे ही हमें खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की कोशिश करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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