मेरठ, 23 जून (प्र)। लखनऊ की घटना के बाद आज मेरठ प्रशासन की नींद भी टूट गई। फायर डिपार्टमेंट की टीम ने प्रशासनिक अफसर के साथ शहर के कोचिंग सेंटरों का रुख किया और वहां की अग्नि सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था को परखा। कई बिंदुओं पर यह निरीक्षण किया गया। लखनऊ में सोमवार को एक भीषण अग्निकांड में 15 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने घटना का संज्ञान लिया और प्रदेश भर में सख्ती के साथ अभियान चलाने के निर्देश दिए। आज सुबह जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह के निर्देश पर मेरठ में भी सरकारी अमला एक्शन में दिखाई दिया।मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुरेंद्र सिंह के अलावा एसीएस सिविल लाइन प्रभाकर त्रिपाठी भी अमले के साथ मौजूद रहे।
अग्निकांड के बाद देर रात तक दमकल विभाग और प्रशासन रणनीति तैयार करने में जुटा रहा। सुबह होते ही टीमों ने शहर के बड़े कोचिंग सेंटरों का रुख किया। निरीक्षण की शुरुआत मंगल पांडे नगर स्थित कोचिंगों से की गई। यहां के दो बड़े कोचिंग में टीम पहुंची और वहां लगे अग्नि सुरक्षा उपकरण स्प्रिंकलर, होज पाइप आदि चेक किये।
एंट्री-एग्जिट से जुड़े मानकों पर फोकस दोनों अधिकारियों ने कोचिंग सेंटर में पहुंचते ही वहां की फायर एनओसी चेक की। इसके बाद आग से निपटने के इंतजाम देखे। कई जगह क्लासेस चल रही थीं। उन क्लासों को भी सुरक्षा की दृष्टि से चेक किया गया। काफी देर कोचिंग सेंटर में खलबली मची रही। मुख्य फोकस कोचिंग की एंट्री और एग्जिट पर रहा। इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था भी देखी गई।
कोचिंग सेंटर के निरीक्षण के दौरान वहां रखे उपकरण भी चेक किए गए। ड्राई पाउडर एक्सटिंग्विशर, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, होज पाइप के साथ ही पानी का प्रेशर भी चेक किया गया और यह देखा गया कि कितनी मंजिल तक पानी पहुंच सकता है। हालांकि अधिकांश सभी कोचिंग सेंटर में एक मंजिल तक की पानी का प्रेशर दिखाई दे रहा है। एसीएस सिविल लाइन प्रभाकर त्रिपाठी का कहना है कि कोचिंग सेंटरों को कई बिंदुओं के तहत चेक किया गया है। अग्नि सुरक्षा के मानक देखे गए हैं। इसके अलावा ट्रेंड स्टाफ से भी बात की गई है। उन्हीं के द्वारा उपकरण चलवा कर भी देखे गए हैं। संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि बेसमेंट में कोचिंग संचालित ना करें। नियमानुसार फायर एनओसी लेकर कोचिंग चलाएं। प्रशासन और दमकल विभाग कोचिंग सेंटरों पर अभियान चला रहा है, इसकी सूचना जैसे ही शहर के अन्य क्षेत्र में संचालित कोचिंग सेंटरों के संचालकों को लगी, उन्होंने कोचिंग बंद कर दिए।

