मेरठ 17 जून (प्र)। चौधरी चरण सिंह विवि का मूल्यांकन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। छात्र को परीक्षक ने जिस कॉपी में 60 नंबर दिए, विवि ने रिजल्ट में उसे सिर्फ छह नंबर देकर फेल कर दिया। एक अन्य छात्र के 59 नंबर की जगह मात्र पांच नंबर मार्कशीट में दिए गए। 15 नंबर पर फेल होने से जिस छात्र को कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया, उसकी कॉपी में 19 नंबर निकले हैं। तीन सौ रुपये फीस देते हुए पहले आरटीआई और फिर कॉपियां दोबारा चेक कराने के लिए 250 रुपये स्क्रूटनी के लिए दिए।
विवि ने मंगलवार को स्क्रूटनी के जो परिणाम जारी किए, उससे सीसीएसयू की पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बीएससी में अरहम खान को विवि ने मात्र छह अंक दिए थे जबकि स्क्रूटनी में उसकी कॉपी में 60 अंक निकले।
विवि ने 60 अंक के बजाय केवल छह अंक ही दर्ज करते हुए छात्र को फेल कर दिया। बीएससी में अफरोज के कॉपी में 59 अंक मिले जबकि उसे विवि ने केवल पांच अंक दिए। एलएलएम में शबाब जेहरा को मार्कशीट में 25 अंक दिए गए जबकि कॉपी में उसके 35 नंबर थे।
मार्कशीट में 15 नंबर, कर दिया फेल
एमएससी में माहिर हुसैन की रिजल्ट में शून्य अंक दिए गए थे। माहिर ने कॉपी ली तो उस पर 15 नंबर दर्ज थे। जब माहिर ने स्क्रूटनी कराई तो उसके 19 अंक मिले। छात्र ने एक महीने पहले लिखित शिकायत करते की। पूर्व महामंत्री अंकित अधाना के अनुसार परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में एक महीने में शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच छात्र को कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। छात्र प्राइवेट नौकरी कर रहा था और उसे मार्कशीट जमा करने को कहा गया।
कहीं नंबर कम तो कहीं योग में गलती
विवि के मंगलवार को जारी स्क्रूटनी परिणाम में कहीं छात्रों को कम नंबर तो कहीं अंकों के योग में गलती मिली है। पूर्व महामंत्री अंकित अधाना के अनुसार परीक्षकों के साथ-साथ डेटा फीडिंग कर रही एजेंसी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। कुछ जागरुक छात्रों ने कॉपी निकलवा ली तो खेल पकड़ा गया जबकि हजारों छात्र अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं। कॉपियों के अंदर एवं बाहर योग में दस-दस अंकों का अंतर है। अंकित के अनुसार लापरवाही के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है। विवि संबंधित कंपनी और परीक्षकों पर आर्थिक दंड लगाकर छात्रों की फीस लौटाए।
आरटीआई में नहीं दे रहे ओएमआर की कॉपी
विवि आरटीआई में निर्धारित फीस लेने के बावजूद छात्र को ओएमआर की कॉपी नहीं दे रहा है। एक छात्र ने तीन सौ रुपये जमा कर अपनी अंतिम वर्ष की ओएमआर की कॉपी मांगी, लेकिन विवि ने खाली पेज स्कैन कर भेज दिया। छात्र के अनुसार जब विवि ने ऑनलाइन आरटीआई के लिए फीस ले ली तो कॉपी क्यों नहीं दी जा सकती। विवि उत्तर कुंजी के साथ छात्र की ओएमआर भी अपलोड करे।

