प्रयागराज 12 फरवरी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य पर शिविर और गुरुकुल की आड़ में नाबालिग बच्चों के यौन शोषण, बाल उत्पीड़न और अवैध गतिविधियों में संलिप्तता जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. मामला अब प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट तक पहुंच गया है.
इन गंभीर आरोपों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे एक गहरी साजिश बताते हुए कहा कि उनके विरोधी अब नीचता की हद पर उतर आए हैं. शंकराचार्य ने कहा, “हमने जो सवाल उठाए थे वे शास्त्र आधारित थे, लेकिन जब वे हमें वहां नहीं फंसा सके, तो अब इस तरह के घृणित आरोपों का सहारा ले रहे हैं.
उन्होंने एक कार्टेल के सक्रिय होने का दावा करते हुए कहा कि इसमें उत्तर प्रदेश सरकार की भी संलिप्तता दिखाई दे रही है. उनके अनुसार, यह सब उन्हें और ज्योतिष पीठ को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है क्योंकि वे गौ माता की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठा रहे हैं, जो सरकार को पसंद नहीं आ रहा.
विवाद की जड़ें पुरानी अदावत में छिपी हैं. हाल ही में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को फर्जी शंकराचार्य बताते हुए उन पर हमला बोला था. वहीं, शंकराचार्य का कहना है कि उन्होंने केवल शास्त्रीय मर्यादा में रहकर प्रश्न उठाए थे, लेकिन उनके विरोधियों ने इसे व्यक्तिगत लड़ाई बना लिया है.
इस तनाव की शुरुआत 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई थी. तब शंकराचार्य को स्नान से रोकने और उनके समर्थकों पर लाठीचार्ज के बाद विवाद बढ़ा था. इसके बाद प्रशासन ने उन्हें शंकराचार्य कहलाने और मेला क्षेत्र खाली करने जैसे नोटिस भी जारी किए थे.
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी और दो नाबालिग पीड़ितों को पेश करने का दावा किया था. कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया।
अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को कहा- हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गोमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा।
अब 20 फरवरी को दोनों पक्षों के वकील कोर्ट में पेश होंगे।
बता दें, चित्रकूट की श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्यवादी और पक्षकार भी हैं। माघ मेले में हुए विवाद के बाद रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने आ गए थे।

