मेरठ 10 जुलाई (प्र)। उफ, यह तो हद हो गई। नगर निगम के अधिकारियों ने तीन करोड़ का बजट तो बना दिया, लेकिन नालों की उचित सफाई नहीं कराई। पूरे साल निगम के अधिकारी बैठकें करते रहे और कागजों पर योजनाएं तैयार करते रहे, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं किया, जिसका खमियाजा 25 लाख की आबादी को भारी जलभराव के रूप में भुगतना पड़ा।
नगर निगम ने वर्ष 2026-27 के बजट में 1831 करोड़ रुपये में नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के हिस्से में 180 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसमें तीन करोड़ रुपये नालों की सफाई पर खर्च करना प्रस्तावित किया है।
हालांकि महानगर की सफाई करने वाले निगम के करीब 450 स्थाई कर्मियों के वेतन की मद में 60 करोड़ रुपये, आउटसोर्सिंग सफाईकर्मियों की मद में 60 करोड़ रुपये, स्वच्छता सामग्री की खरीद की मद में दो करोड़ रुपये, डोर-टू- डोर कूड़ा कलेक्शन की मद में पांच करोड़ रुपये, चूना पाउडर व अन्य सामग्री की खरीद की मद में 20 लाख रुपये, कार्यशाला सामान्य अधिष्ठान की मद में नौ करोड़ रुपये, आउटसोर्सिंग के ड्राइवरों के वेतनमान के मद में छह करोड़ रुपये, कूड़ा उठाने वाले वाहन और मशीनों आदि की मरम्मत व अनुरक्षण की मद में 7.50 करोड़ रुपये दायित्व की मद में पांच करोड़ रुपये और कार्यशाला के वाहनों के डीजल व लुब्रीकेंट की मद में 23 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए थे। इतने भारी भरकम बजट के बावजूद न तो महानगर की सफाई व्यवस्था में कोई खास सुधार नजर आया और न ही नालों की सफाई नजर आई। मानसून की पहली बारिश से बजट के खर्च में भ्रष्टाचार की बदबू उठने लगी है। नगर निगम की कई बोर्ड, विशेष बोर्ड और कार्यकारिणी की बैठक में नालों की सफाई को लेकर कोई चर्चा तक नहीं हुई। निगम के अफसरों को भली भांति पता है कि हर वर्ष महानगर में जलभराव होता है।
गत वर्ष बरसात कांवड़ियों के गंदे पानी के बीच से गुजरने पर राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई की नाराजगी के बाद डीएम डॉ. वीके सिंह, नगरायुक्त सौरभ गंगवार को लेकर गंदे पानी के बीच पहुंचे। वह घंटों गंदे पानी के बीच रहे। डीएम ने तभी नगर निगम के अधिकारियों को पानी की निकासी की कोई ठोस योजना बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने पूरे साल नालों की सफाई की कोई ठोस योजना नहीं बनाई जो योजना बनाई भी गई, वह धरातल पर नहीं उतरी नगर निगम ने कुछ नए नालों का निर्माण कराया तो कुछ पुराने नालों का दोबारा निर्माण कराया, लेकिन इनकी गुणवत्ता और इनके ढाल का ध्यान नहीं रखा गया, नतीजा अधिकांश नालों से पानी आगे बढ़ नहीं पा रहा। काली नदी के मुहाने पर करीब छह मीटर ऊंचाई तक सिल्ट जमी है, इसलिए वहां पानी की निकासी नहीं हो रही। वहां की सफाई की आवश्यकता थी, लेकिन वहां सफाई नहीं कराई गई। इसी वजह से वहां से पानी बैक मार रहा है और महानगर को टापू में तब्दील कर रहा है। यदि अधिकारी नालों की सफाई ढंग से कराते और पानी की निकासी की ठोस योजना बनाकर उसपर काम करते तो महानगर को आज इतना कुछ नहीं झेलना पड़ता।
ये है नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का बजट
वर्ष 2026-27 के बजट में निगम स्वास्थ्य विभाग का 180 करोड़ रुपये का बजट है।
तीन करोड़ रुपये नालों की सफाई पर खर्च करना प्रस्तावित है।
निगम के करीब 450 स्थाई कर्मियों के वेतन की मद में 60 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
आउटसोर्सिग सफाईकर्मियों की मद में 60 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
स्वच्छता सामग्री की खरीद की मद में दो करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की मद में पांच करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
सामग्री की खरीद की मद में 20 लाख रुपये प्रस्तावित हैं।
कार्यशाला सामान्य अधिष्ठान की मद में नौ करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
आउटसोर्सिग के ड्राइवरों के वेतनमान के मद में छह करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
वाहन मशीनों आदि की मरम्मत व अनुरक्षण की मद में 7.50 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
दायित्व की मद में पांच करोड़ रुपये।
कार्यशाला के वाहनों के डीजल व लुब्रीकेंट की मद में 23 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

