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    Home»देश»बगैर ट्रायल जेल में रखना सजा के बराबर : शीर्ष कोर्ट
    देश

    बगैर ट्रायल जेल में रखना सजा के बराबर : शीर्ष कोर्ट

    adminBy adminMarch 30, 2026No Comments4 Views
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    नई दिल्ली, 30 मार्च (हि। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बिना ट्रायल किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना सजा के समान है। अदालत ने इसी आधार पर हत्या के प्रयास के एक मामले में दो साल से जेल में बंद पंजाब के एक निवासी को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और पीवी वराले की पीठ ने अपने हालिया आदेश में यह टिप्पणी की।
    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस पीवी वराले की बेंच ने अपने हालिया आदेश में कहा कि प्रदीप कुमार उर्फ ग्ग्बानू पर फरवरी, 2024 में हत्या की कोशिश सहित कई अपराधों के तहत केस दर्ज किया गया था, लेकिन अभियोजन पक्ष ने अभी तक इस मामले से जुड़े 23 गवाहों में से किसी की भी गवाही नहीं ली है। कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 11 जुलाई, 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कुमार की ज़मानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
    बेंच ने अपने 13 मार्च के आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी पर लगे आरोपों को साबित करने के लिए 23 गवाहों की गवाही लेने का प्रस्ताव रखता है, लेकिन अभी तक किसी की भी गवाही नहीं हुई है। इसलिए ट्रायल पूरा होने में अभी कुछ समय लगने की संभावना है। कोर्ट ने आगे कहा कि कुमार की गिरफ्तारी को लगभग दो साल बीत चुके हैं, लेकिन ट्रायल अभी तक शुरू नहीं हुआ है और न ही इसके जल्द खत्म होने की कोई उम्मीद नजर आ रही है।

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