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    Home»देश»मुख्यमंत्री जी सुनियोजित विकास और सौंदर्यीकरण व सरकारी नीतियों का पालन कराने हेतु! अवैध निर्माणों की कंपाउंडिंग पर रोक के बावजूद मेडा आवास विकास आदि कैसे कर रहे हैं शमन, ये क्यों नहीं देखते कि जो टूटने वाला हिस्सा था उसका क्या हुआ
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    मुख्यमंत्री जी सुनियोजित विकास और सौंदर्यीकरण व सरकारी नीतियों का पालन कराने हेतु! अवैध निर्माणों की कंपाउंडिंग पर रोक के बावजूद मेडा आवास विकास आदि कैसे कर रहे हैं शमन, ये क्यों नहीं देखते कि जो टूटने वाला हिस्सा था उसका क्या हुआ

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJuly 17, 2026No Comments5 Views
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    सत्ताधारी दल और उसके सहयोगी दलों के ज्यादातर नेता शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में बड़ी बड़ी बात कर चुके हैं। सांसद द्वारा मांग की गई है कि यहां के दुकानदारों को अन्य स्थान पर जगह दी जाए लेकिन कोई भी जहां तक पता चलता है ऐसे प्रकरण दोबारा ना हो इसके लिए आवास विकास और मेरठ विकास प्राधिकरण नगर निगम पर दबाव क्यों नहीं बनाते। क्योंकि एक तरफ तो यहां तोडृफोड़ चल रही है। सुप्रीम कोर्ट कह चुकाहै कि कार्रवाई होगी। उसके बावजूद मानचित्र के विपरीत सरकार की निर्माण नीति का उल्लंघन कर अवैध निर्माणों की लाइन लगी है और कुछ तो ऐसे हैं जो सरकारी जमीन पर बने हैं। ९० प्रतिशत तो ऐसे है जो बिना सैटबैक छोड़े रोड बाइडिंग और हरित पटटी कीजमीन भी नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में हम कहां जाकर रुकेंगे और इन कारणों से जो सरकार की छवि पर प्रश्न चिन्ह लगताहै इसे रोकने के लिए नेता सक्रिय क्यों नहीं होते।
    पिछले कुछ सालों में सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि अवैध निर्माणों का समन और कंपाउंडिंग नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह इस कुव्यवस्था को बढ़ावा देरहे हैं और सुनियोजित विकास में अड़ंगा है। उसके बावजूद पिछले पांच सालों में सभी जिम्मेदार विभाग अवैध बनी इमारतों का शमन और कंपाउंड कर रहे हैं। जिन निर्माणों का शमन व कपंाउंड किया जाता है उसके बारे में यह सार्वजनिक नहीं किया जाता है कि कितने हिस्से को कंपाउंडिंग किया गयाहै । बस यह कहकर कि मामले का शमन कर दिया गया है मामले की इतिश्री कर ली जाती है। पिछले दिनों मेडा वीसी ने अवैध निर्माणों की सूची तलब की। इस पर नागरिकों का कहना है कि काफी समय से वीसी यहां तैनात है आजतक उन्हें यह नहीं पता चला कि कितने अवैध निर्माण है और कितने सील लगे भवनों में शोरुम चल रहे हैं। कितने कंपाउंड हुए निर्माणें में अवैध निर्माण तोड़ा गया या नहीं। यह स्थिति तब है जब लोग अफसरों से मिलकर लिखित में शिकायतें कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि ९० प्रतिशत के लगाभग स्कूल नर्सिंग होम अस्पताल होटल और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शोरुम व बैंक अवैध रूप से बने भवनों में चल रहे हैं। जब इनकी शिकायत होती है तो पुराना निर्माण, कंपाउंड हो गया है, कुछ के बारे में सील लगाने या एफआईआर कराने की बात की जाती है लेकिन सीएम पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण से पहले यह नहीं बताया जाता कि नक्शा क्या पास था मौके पर बना क्या है और पुराने निर्माण में अनुमति ली या नहीं। प्रतिबंध के बावजूद बेंसमेंट बन रहे हैं। फिर भ्ीा जिम्मेदार विभागों के अफसर मूकदर्शक क्यों बने हैं। सवाल उठता है कि अदालत के आदेश बड़े हैं या पुराने नियमों के आधार पर निरंतर अवैध निर्माणों को बचा रहे अधिकारियों की सोच। लोगों का यह कहना भी सही है कि आम आदमी के छोटे निर्माणों और मरम्मत के दौरान जेई ऐई खड़े हो जाते हैं और अवैध निर्माणों को बचाने में पूरा जोर लगा देते हैं। व्यक्तिगत सुविधाओं धनसंपत्ति बढ़ाने के लिए अवैध निर्माणकर्ताओं को बचाने का प्रयास इनके द्वारा कहा जा रहा है। माननीय मुख्यमंत्री जी आए दिन पढ़ने को मिलता है कि आय से अधिक संपत्ति होने की जांच हो रही है और यह बात सहीभी निकलतीहै तो फिर अपने खुािफया तंत्र के माध्यम से पता लगाकर इंजीनियरों की आय अैर संपत्ति की जांच क्यों नहीं कराई जा रही। यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि आम आदमी के टैक्स का पैसा जो सरकार को मिल रहा है और वो विकास कार्य कराने और वादे को पूरा करने के लिए विभागोंको सौंप दी जाती है और अफसर इसका कैसे बंदरबांट कर रहे हैँ इसके उदाहरण के रुप में पिछले दस साल में बने पुल नालों और सड़कों को देखा जा सकता है और चौराहे के सौंदर्यकरण के नाम पर पैसों की बंदर बांट करने वालों पर जब तक कार्रवाई नहीं होगी तब तक अदालत के आदेशों का पालन नहीं हो सकेगा। दिन में लगने वाले जाम अवैध निर्माणों से प्रभावित होते विकास कार्य और सौंदर्यीकरण के लिए अफसरों की कार्यप्रणाली पर ध्यान देना ही होगा। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के निर्माण के दोषी अफसरों के अतिरिक्त सरकार कुछ ईमानदार अफसरों की समिति बनाकर मेडा नगर निगम और आवास विकास के अफसरों की गोपनीय जांच कराए तभी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की भावनाओं के साकार होने का मार्ग साफ हो सकता है लेकिन जब तक खेत की बाढ़ को ढोरों के खाने की कहावत चरितार्थ होती रहेगी तब तक सरकार की योजनाएं पूरी होनी नही ंलगती है। अगर अफसर चाहते हैं कि अवैध निर्माणों का पता चले और कार्रवाई क्यों नहीं हुई तो दस साल में सीएम पोर्टल पर हुई शिकायतों में मेडा और आवास विकास से संबंधित शिकायतों को दोबारा देंखे तो स्थिति साफ हो सकती है। लोगों की समस्याओं के समाधान और गांव शहरों की खुशहाली के लिए अब कुछ करना होगा।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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