लखनऊ 8 जनवरी। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टालने का संकेत मिल रहे हैं। मुख्य कारण अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है, जिसके चलते पंचायतों में आरक्षण की प्रक्रिया भी तय नहीं हो पा रही है। पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने फिर दावा किया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव समयानुसार अप्रैल-मई में ही होंगे। पंचायतीराज विभाग ने छह सदस्यीय आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जनगणना 2011 के अनुसार, राज्य में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत क्रमशः 20.6982 और 0.5677 प्रतिशत है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन वर्गों के लिए इतनी ही प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी।
ओबीसी जातियों का प्रतिशत जनगणना में शामिल नहीं था। रैपिड सर्वे 2015 में राज्य की ग्रामीण आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी 53.33 प्रतिशत थी। 2021 के चुनाव में इसी सर्वे के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय किया गया था। हालांकि, किसी भी ब्लॉक में ओबीसी की जनसंख्या 27 प्रतिशत से अधिक होने पर भी ग्राम प्रधान के पद 27 प्रतिशत से अधिक आरक्षित नहीं हो सकते। यदि यह प्रतिशत 27 प्रतिशत से कम हो, तो उसी अनुपात में पद आरक्षित होंगे। प्रदेश स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रतिशत 27 प्रतिशत रखना अनिवार्य है।
नगर निकाय के चुनाव में ओबीसी की आबादी के आंकड़ों को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद सरकार ने नगर निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर रिपोर्ट तैयार करवाई थी। पंचायत चुनाव में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों में जाकर ओबीसी की आबादी का सर्वे करेगा। उसके बाद ही आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी।
पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर ही होंगे। जब उनसे पूछा गया कि आयोग अभी तक क्यों नहीं बना, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलेंगे। उनका कहना है कि आयोग गठित होने के दो माह के भीतर अपनी रिपोर्ट दे देगा।
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