नई दिल्ली 17 दिसंबर। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से डिजिटल अरेस्ट के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए न्याय मित्र द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की पीठ को अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने बताया कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए केंद्र जल्द ही बैठक करेगा, जिसमें सीबीआई के इनपुट और न्याय मित्र एन एस नप्पिनई के सुझाव शामिल होंगे।
डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़े
डिजिटल अरेस्ट साइबर क्राइम का एक तेजी से बढ़ता हुआ रूप है, जिसमें धोखेबाज पुलिस या कोर्ट अधिकारियों या सरकारी एजेंसियों के कर्मचारियों के रूप में पीड़ितों को ऑडियो या वीडियो कॉल करते हैं और उन्हें किसी फर्जी चीज का डर दिखाकर डराते हैं। इस तरह अपराधी पीड़ितों को बंधक बनाते हैं और उन पर पैसे देने का दबाव डालते हैं।
एमिकस क्यूरी के सुझाव पर विचार करेगी सरकार
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ को अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के मुद्दे पर विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए जल्द ही एक अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सीबीआई द्वारा उठाए गए मुद्दे और एमिकस क्यूरी एन एस नप्पिनई के सुझावों पर चर्चा होगी। मामले में एमिकस क्यूरी नप्पिनई ने यूनाइटेड किंगडम के ऑथराइज्ड पुश पेमेंट मॉडल की तर्ज पर पीड़ितों को मुआवजा देने की योजना शुरू करने का सुझाव दिया, जिसमें बैंकिंग चैनल के हस्तक्षेप के माध्यम से पीड़ितों को अनिवार्य रूप से मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा।
इस पर पीठ ने आदेश दिया, ‘हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभी हितधारक, अटॉर्नी जनरल के मार्गदर्शन में, अपनी तरफ से उचित निर्णय लेंगे और इस अदालत को सूचित करेंगे। एमिकस की सिफारिशों पर संबंधित पक्षों द्वारा भी विचार किया जा सकता है।’
सुप्रीम कोर्ट ने दिए अहम सुझाव
बीती 1 दिसंबर को, शीर्ष अदालत ने सीबीआई को डिजिटल-अरेस्ट मामलों की पूरे भारत में एक एकीकृत जांच करने के लिए कहा और रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया से पूछा कि वह साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों का पता लगाने और उन्हें फ्रीज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के एक बुजुर्ग जोड़े की शिकायत पर दर्ज किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले में और भी कई निर्देश दिए, जिसमें इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंटरमीडियरीज को डिजिटल-अरेस्ट मामलों से जुड़ी जांच में सीबीआई को डिटेल्स और सहयोग देने का निर्देश दिया। CJI ने इस बात पर भी जोर दिया कि जब इस तरह के धोखाधड़ी वाले लेनदेन होते हैं तो बैंकों को अलर्ट करने के लिए स्वचालित सिस्टम बनाने की भी जरूरत है।

