देश में सरकारी कर्मचारियों और अफसरों से ज्यादा सुविधाएं प्राप्त करने वाले बैंक कर्मचारियों द्वारा यूएफबीयू के आहवान पर बीते दिवस देशभर में हड़ताल की गई। बताते हैं कि ८४ हजार कर्मचारी हड़ताल पर रहे जिससे प्रदेश की ६६०० शाखाएं बंद रहीं। लखनऊ में करीब २५०० करोड़ की क्लीयरिंग प्रभावित हुई। लोकतंत्र में अपनी बात कहने का सबको अधिकार है मगर सुविधाजनक सेवा मेें आने के बाद यह ध्यान रखना भी हर कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि जिस क्षेत्र में भी वह कार्यरत है उससे संबंध नागरिकों के समक्ष उनके कारण कोई कठिनाई पैदा ना हो। नौ यूनियन के संयुक्त मंच ऑल इंडिया बैक कर्मचारी के अध्यक्ष की मानें तो चार लाख करोड़ के चेक क्लीरियंस के कारण हुए रहे। नकद लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक कर्मियों को मिलने वाली सुविधाएं पर्याप्त है जबकि ज्यादातर कर्मी डयूटी निभाने के बजाय ग्राहकों से दुर्व्यहवहार करते नजर आते हैं। मेरा मानना है कि या तो सरकार बैंक कर्मियों की हड़ताल पर रोक लगाए चाहे उन्हें घर बैठे वेतन देने लगे मगर जो समस्याएं जनता के सामने हैं उनका समाधान होना चाहिए और जो चेक हड़ताल के दौरान जमा होने चाहिए थे ऐसे चेकों को हड़ताल की अवधि का छूट देते हुए तीन माह की अवधि पूरी होने पर क्लीयरंस का लाभ दिया जाना वक्त की सबसे बड़ी मांग है। बैंक ग्राहकों का हित सर्वोपरि मानते हुए कार्रवाई हो।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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