अयोध्या, 29 जनवरी। अयोध्या की एक अदालत ने चर्चित भदरसा गैंगरेप केस में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को बरी कर दिया है। मामले में डीएनए जांच रिपोर्ट ‘निगेटिव’ आने के बाद मुख्य आरोपी समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को गत दिवस बरी किया गया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) निरुपमा विक्रम ने खान (66) को बरी कर दिया और उनके नौकर राजू को दोषी करार दिया। यह मामला 12 साल की लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके गर्भवती होने से जुड़ा है। भदरसा पुलिस थाने में 29 जुलाई, 2024 को मोईद खान और उनके नौकर राजू के मामला खिलाफ दर्ज किया गया था।
मोईद खान के वकील सईद खान ने बताया कि अदालत ने मोईद के नौकर राजू को गत दिवस दोषी करार दिया. उन्होंने बताया कि मोईद खान और राजू के डीएनए की जांच की गई थी जिसमें खान की डीएनए जांच ‘निगेटिव’ आई, जबकि राजू की डीएनए जांच सकारात्मक आई, इसके आधार पर अदालत ने यह निर्णय दिया। मालूम हो कि इस केस में नाम आने के बाद सपा नेता के शॉपिंग कॉप्लेक्स पर बुलडोजर भी चला था। इस केस में सपा नेता को जेल भी जाना पड़ा था।
अभियोजन के अनुसार घटना पूराकलंदर क्षेत्र की है। किशोरी खेत में काम करने गई थी। राजू उसे मोईद खान की बेकरी पर काम करने ले गया। वहां मोईद ने उससे दुष्कर्म किया। राजू ने मोईद खान की मोबाइल से वीडियो बनाई। उसके बाद राजू ने भी दुष्कर्म किया।
वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे कई बार दुष्कर्म किया गया, जिससे वह गर्भवती हो गई। उसकी तबियत खराब होने पर इसकी जानकारी हुई। किशोरी की मां की तहरीर पर 29 जुलाई, 2024 को पूराकलंदर में राजू खान व मोईद खान के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई।
सपा नेता मोईद खान का नाम सामने आने पर यह मामला हाई प्रोफाइल हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे सदन में उठाया और सपा को कटघरे में खड़ा किया। सांसद अवधेश प्रसाद के साथ मोईद खान की फोटो दिखाकर राजनीतिक स्टंट चलाया गया। भाजपा समेत कई दलों के नेता पीड़िता के घर गए। मोईद खान की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया गया।
उनका बहुमंजिला शॉपिंग कॉम्पलेक्स अवैध होने के कारण ध्वस्त कर दिया गया। मोईद की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम निरुपमा विक्रम की अदालत से 28 अगस्त, 2024 को निरस्त हो गई। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिल पाई।
उच्च न्यायालय ने उनकी प्रथम जमानत याचिका खारिज करते हुए मुकदमा की वादिनी व पीड़िता के बयान विचारण न्यायालय में दर्ज होने के बाद नए सिरे से जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट प्रदान की थी। उच्च न्यायालय में उन्होंने द्वितीय जमानत अर्जी पेश की, जिस पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ ने 16 अक्तूबर, 2025 जमानत अर्जी स्वीकृत की है।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम की अदालत ने सपा नेता मोईद अहमद को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने व पेश किए गए प्रमाण के आधार पर दोषमुक्त कर दिया। मोईद पर अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई, लेकिन गैंगस्टर एक्ट में आरोपी होने के कारण मोईद की जेल से रिहाई नहीं हो पाएगी।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से 13 गवाह परीक्षित कराए गए। लंबी बहस के दौरान मोईद की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने जब अदालत में तर्क रखना शुरू किया तो अभियोजन पक्ष कोई जवाब नहीं दे सका। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में घटनास्थल बेकरी बताया गया है, जबकि विवेचना के दौरान घटनास्थल बेकरी से काफी दूर है।
सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो जिस मोबाइल से बनाया जाना कहा गया, उसकी फॉरेंसिक जांच में पुष्टि नहीं हुई। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को दिए बयान में राजू खान के साथ मोहित का नाम लिया है। पुलिस के दवाब में पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के सामने फिर से कराया गया, जिसमें मोईद खान का नाम बताया गया।
पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को दिए पहले बयान में जिस मोहित का नाम लिया था, वह पीड़िता की बहन का देवर है और पड़ोस में रहता है। बचाव पक्ष से मोहित के निवास का प्रमाण व मतदाता पहचान पत्र अदालत में पेश किया गया। पीड़िता के डीएनए की जांच में भी मोईद के विरुद्ध कोई अपराध नहीं पाया गया। मोईद की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने उन्हें निर्दाेष बताते हुए राजनीति के तहत फर्जी फंसाने का तर्क दिया और दोषमुक्त करने की मांग की।
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