वायुसेना कर्मियों के मर्जी से नौकरी छोड़ने के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा गत बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा गया कि भारतीय वायु सेना के अधिकारियोंध्कर्मियों को अपनी मर्जी से नौकरी छोड़कर सिविल सेवा पर जाने का श्बिना शर्त अधिकार्य नहीं है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पूर्व मंजूरी लेना कोई मामूली प्रक्रिया नहीं है, जिसे नजरअंदाज किया जा सके। पीठ ने पीठ ने सेना की ऑपरेशन और कामकाज को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए वायु सेना की पहले से मंजूरी लेने की प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना जरूरी बताया। वायु सेना के नियमों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि तय की गई शर्तें सिर्फ प्रक्रिया से जुड़ी नहीं थीं, इसलिए उनका पालन करना अनिवार्य था।
उच्चतम न्यायालय के इस फैसले में देशहित के कई बिंदु छिपे हैं। क्योंकि सरकारी नौकरियों के लिए युवाओं को तैयार करने हेतु अभिभावकों केसाथ साथ आम आदमी के टैक्स की कमाई से सरकार द्वारा भी बजट खर्च किया जाता है। कई बार पढ़ने को मिलता है कि समय से पूर्व सेवानिवृति ले ली और फिर पेंशन तो मिल ही रही है। एक अवधि के बाद और अवकाश लेने वाले लोग दूसरी जगहों पर जाकर अपनी सेवाएं देकर वहां से भी तनख्वाह लेते हैं। बड़ी बात यह है कि इनके द्वारा किसी पात्र युवा के अधिकारों का हनन किया जाता है क्योंकि जहां उसे तैनात होनाचाहिए वहां इनकी नियुक्ति हो जाती है। पूर्व में कितने ही आईएएस आईपीएस आदि अफसर अवकाश लेकर विदेशों में चले जाते हैं या लेक्चर देने के नाम पर इंस्टीटयूट में नौकरी करते हैँ और जब बवाल मचता है तो सेवानिवृति के लिए आवेदन कर देते हैं। मेरा माननाहै कि अगर अधिकारी या कर्मचारी स्वस्थ है और मेडिकल रिपोर्ट सही है तो उसे फर्जी पत्रावली के आधार पर सेवानिवृति नहीं दी जानी चाहिए। अगर फिर भी कोई प्रयास करता है तो सरकार और युवाओं के हित में उनकी पेंशन समाप्त की जाए और इस पद तक पहुंचने के लिए सरकार का जितना खर्च हुआ वो इनके फंड से काटा जाए। क्योंकि प्राथमिक कक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकार द्वारालाखों करेाड़ों का वेतन कर्मचारियों शिक्षकों को देने पड़ते हैं। सबकुछ उपयोग करने के बाद नौकरी में आने वाला कर्मी अवकाश ले यह सही नहीं है। हर सरकारी व्यवस्था में इस नियम को लागू किया जाए। अगर कोई काम करने में अक्षम है तो उसे सेवा से मुक्ति देने के साथ लाभ भी खत्म किए जाएं। कई बार देखने को मिला कि देश की सीमाओं पर तैनात जवान हर मौसम में डयूटी निभाते हैँ इसीसेवा के कुछ लोग समय से सेवानिवृति प्राप्त कर कोई सरकार से जमीन लेताहै कोईकुछ और। अगर यह सुविधा देनी है तो उनको दी जाए तो पूरे समय देश की सुरक्षा करते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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