प्रयागराज 30 जुलाई। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) नैनी में आयोजित वार्षिक/अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा के सैद्धान्तिक विषय की Computer Based Test (CBT) परीक्षा में परीक्षार्थियों से पैसे लेकर परीक्षार्थियों के स्थान पर सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराई गई थी। इस मामले में परीक्षा में बैठने वाले सॉल्वर, संस्थान के प्रिंसिपल व अनुदेशक सहित 11 लोगों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है।
ये लोग किए गए गिरफ्तार
एसटीएफ ने परीक्षार्थियों से पैसे लेकर मूल परीक्षार्थी के स्थान पर सॉल्वर बैठाकर सामूहिक नकल कराकर परीक्षा पास कराने वाले सॉल्वर गैंग के सक्रिय सदस्य शिवम कुमार, रणविजय सिंह, जय सिंह, जितेन्द्र पटेल, दिलीप कुमार पटेल तथा संस्थान के प्रिंसिपल अशोक कुमार, कार्यदेशक/परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश, अनुदेशक फूल प्रकाश, अनुदेशक धीरज कुमार शर्मा, अनुदेशक राजेश कुमार तथा अनुदेशक राजकुमार मौर्या को दबोचा।
एक आरोपित प्रतापगढ़ तो बाकी प्रयागराज के रहने वाले हैं। गिरफ्तार अभियुक्त अशोक कुमार (प्रधानाचार्य) ने पूछताछ पर बताया कि वह दिनांक 18 जून.2025 से राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान नैनी में कार्यरत है।
कार्रवाई के दौरान 5.10 लाख रुपए नकद, कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल फोन और परीक्षा से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि पढ़ाई में कमजोर छात्रों से प्रति अभ्यर्थी 4 हजार रुपए लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाए जाते थे।
सॉल्वर अलग लैब में ऑनलाइन परीक्षा देते थे और इसके बदले उन्हें सिर्फ 500 रुपए मिलते थे। पूरे नेटवर्क का संचालन एक अनुदेशक के जरिए किया जा रहा था, जिसकी तलाश जारी है।
एसटीएफ के मुताबिक, राजकीय आईटीआई नैनी में 11 जुलाई से 8 अगस्त तक अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा की कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा तीन पालियों में कराई जा रही थी। कई दिनों से शिकायत मिल रही थी कि संस्थान के कुछ अधिकारी और कर्मचारी पैसे लेकर सॉल्वर बैठा रहे हैं और सामूहिक नकल भी करा रहे हैं। इसके बाद एसटीएफ ने पूरे मामले पर निगरानी शुरू कर दी।
तीसरी पाली में पड़ा एसटीएफ का छापा
29 जुलाई को मुखबिर से सूचना मिली कि तीसरी पाली की परीक्षा में फिर सॉल्वर बैठाए गए हैं। इसके बाद एसटीएफ ने नैनी पुलिस के साथ शाम करीब चार बजे कौशल विकास भवन में छापा मारा। कार्रवाई दो चरणों में हुई। मौके से पांच सॉल्वर और संस्थान के छह अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार कर लिए गए।
ऐसे चलता था पूरा खेल
पूछताछ में सामने आया कि परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश, अनुदेशक फूल प्रकाश, राजकुमार मौर्य, धीरज कुमार शर्मा, राजेश कुमार और अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से यह रैकेट चल रहा था। कमजोर छात्रों से प्रति अभ्यर्थी 4 हजार रुपए लिए जाते थे। फिर उनके प्रवेश पत्र की कॉपी के आधार पर सॉल्वर को अलग लैब में बैठाकर ऑनलाइन परीक्षा दिलाई जाती थी। सॉल्वर रोल नंबर और जन्मतिथि के जरिए लॉगिन कर पूरी परीक्षा देते थे।
एसटीएफ के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का संचालन पहले नैनी आईटीआई और फिलहाल बांदा आईटीआई में तैनात अनुदेशक धीरन्जन कुमार कर रहा था। वही सॉल्वर उपलब्ध कराता था और मोबाइल व व्हाट्सएप कॉल के जरिए पूरे रैकेट को संचालित करता था। फिलहाल वह फरार है और उसकी तलाश में पुलिस टीमों को लगाया गया है।

