मेरठ 15 जुलाई (प्र)। दिल्ली- दून हाईवे पर स्थित सुपरटेक मेरठ स्पोटर्स सिटी के एफ टावर में 11वीं मंजिल पर लिफ्ट मंगलवार देर रात रुक गई। इसमें एक ही परिवार के पांच सदस्यों फंस गए। 20 मिनट तक उनकी सांस अटकी रही। जान बचाने को वह लिफ्ट में चिल्लाते रहे। स्वजन व करीबियों को फोन करते रहे। बताया जा रहा है कि बिजली गुल होने से नहीं, बल्कि मेंटीनेंस नहीं होने से लिफ्ट रुकी। 20 मिनट बाद पहुंचे टावर के लोगों ने किसी तरह लिफ्ट का दरवाजा खोलकर फंसे लोगों को बाहर निकाला। इस पूरी घटना की वीडियो और फोटो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गए।
दून हाईवे पर सुपरटेक मेरठ स्पोटर्स सिटी कालोनी में पांच टावर हैं। सभी टावर 14 मंजिल के हैं। चार टावरों में दो-दो लिफ्ट हैं, जबकि पांचवें टावर डी वन में एक ही लिफ्ट हैं। पांचों टावरों में 445 फ्लैट हैं। करीब 350 फ्लैट में लोग रहते हैं। बी चार टावर निवासी उमेश सक्सेना ने बताया कि मंगलवार रात एफ टावर में 11 वीं मंजिल के फ्लैट में रहने वाले परिवार के पांच सदस्य ग्राउंड फ्लोर से लिफ्ट से अपने फ्लैट जा रहे थे। लिफ्ट 10 वीं और 11वीं मंजिल के बीच पहुंची, तभी वह रुक गई। लिफ्ट सवार लोगों ने शौर मचाया तो लोगों की भीड़ जमा हो गई। काफी प्रयास के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोलकर फंसे लोगों को खींचकर बाहर निकाला गया।
उमेश सक्सेना ने बताया कि लिफ्ट लंबे समय से मेंटीनेंस नहीं होने से रुकी। लिफ्ट में फंसे लोगों को निकालने के वीडियो और फोटो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गए। कालोनी के लोगों का कहना है कि टावर के मेंटीनेंस का कार्य वाईजी स्टेट कंपनी देखती है। तैनात मैनेजर मोहित कौशिक काफी समय पहले चले गए है। अब कालोनी की मेंटीनेंस रामभरोसे हैं। मैंटीनेंस आफिस मैनेजर अमरपाल से उनका पक्ष जानने को काल की, मगर मोबाइल स्विच आफ था।
यह बोले टावरवासी
सुपरटेक मेरठ स्पोटर्स सिटी कालोनी निवासी उमेश सक्सेना, मुकेश बालियान, देवराज राठी, संजय, विचित्र वीर सिंह, विशाल गर्ग, आरके सिंह ने बताया कि प्रत्येक पांच टावर में दो-दो लिफ्ट पास हैं। इसमें से चार टावर में दो- लिफ्ट लगी हैं। डी -वन टावर में एक लिफ्ट है। बेसमेंट में अभी तक बरसात का पानी भरा है। बी-फोर टावर में दो दिनों से पेयजल की समस्या है। मेंटीनेंस आफिस के कर्मचारी कभी मोटर खराब होने तो कभी वोल्टेज कम होने का हवाला देते हैं। लोगों को पीने का पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। मेंटीनेंस शुल्क देने के बाद भी मूलभूत सुविधा नहीं मिल रही है।

