आजकल एक बात बहुत सुनने को मिलती है कि फलां व्यक्ति ठीक नहीं है और ऐसी चर्चा करने वालों में परिवार के लोग मित्र समाजसेवी व्यापारिक पार्टनर सभी क्षेत्रों में सुनने को मिल जाएगी और इससे हम किसी के बारे में अपनी राय बना लेते हैं। उससे सामने वाले का कुछ भले ही ना बिगड़े लेकिन अपने को नुकसान और अपनों से दूरी बनते देर नहीं लगती। मैंने देखा कि औरों की बात सुनकर या किसी से मिलकर उसके बारे में किसी तरह की राय नहीं बनानी चाहिए। क्योंकि हो सकताहै कि जब आप उससे मिले हो या किसी काम से गए तो वो किसी कारण से परेशान हो और सही तरह से आपकी बात समझ ना पाया हो क्योंकि अपनी कठिनाई सुलझाने में उसका ध्यान ज्यादा लगा रहताहै। इसी प्रकार हम किसी नेता या अधिकारी से मिलने जाएं और सही जवाब ना मिले या मुलाकात ना हो तो हम यह सोचने लगते हैं कि यह अफसर जिम्मेदार नहीं है। इससे मिलना बेकार है। लगभग दस साल पहले मेरठ में डीएम महेश शर्मा जी की तैनाती हुई। मैं उनसे मिलने पहुंचा। मुलाकात देर से हुई और संतुष्टि भी नहीं हुई। तो मैने सोच लिया कि उक्त अफसर काम में उतनी रुचि नहीं लेता जितनी लेनी चाहिए। कुछ दिनों बाद पुलिस लाइन में एक समारोह में किसी ने मुलाकात कराई तो वो मिले तो वह बोले की मिलने आईए चाय पियेंगे और जानकारी का आदान प्रदान होगा। तब मेरे यह कहने पर कि मैं आपसे मिलने गया था लेकिन आपके व्यवहार से मैं संतुष्ट नहीं था। तो वह बोले कि हो कसता है कि जब आप आए तो मैं किसी परेशानी में रहा हूंगा। इसलिए एक बार मिलकर किसी के बारे में कोई राय नहीं बनानी चाहिए। एक बार किसी समारोह में मंच से एक सज्जन बोले कि मुझसे कोई मिलना आया लेकिन मैं उसे उतना समय नहीं दे पाया तो वह नाराज हो गया और बाद में मैंने उसकी गलतफहमी दूर की। ऐसे मामले आए दिन होते रहते हैं और उन्हें लेकर हम लोगों से दूरी बना लेते हैँ जिसमें उसकी सामाजिक छवि तो धूमिल हो लेकिन हमें कई प्रकार के नुकसान हो जाते हैं क्योंकि हम दोबारा उससे मिलना नहीं चाहते। इसलिए किसी के बारे में एक बार मिलने पर कोई राय नहीं बनानी चाहिए। अगर सामने वाले का व्यवहार समझ में नहीं आता तो दोबारा मिलने जाएं और फिर भी ऐसा लगे तो फिर दूरी मत बनाओ। ऐसी बातों से समाज में दूरी बढ़ती है और अपने काम भी प्रभावित होते हैं। जो सही नहीें है। इसलिए कई बार मिलो। अगर सामने वाला सही बात नहीं कर रहा तो उसे बातों से समस्या सुनने के लिए गांधीवादी तरीके से तैयार करो वो ही सबके हित में है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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