लखनऊ, 15 जुलाई (ता)। कार्यकाल समाप्त होने पर ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाए जाने के बाद अब क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों (ब्लाक प्रमुखों) को भी प्रशासक बना दिए जाने की तैयारी है। सरकार इससे संबंधित आदेश 18 जुलाई तक जारी कर सकती है। 19 जुलाई को कार्यकाल समाप्त होने के बाद ब्लाक प्रमुख भी प्रशासक के रूप में क्षेत्र के सामान्य रूटीन कार्यों को कराते नजर आएंगे।
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के प्रदेश सरकार के निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई चल रही। उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 की धारा 12 (3-क) की संवैधानिकता को चुनौती दिए जाने वाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अब इस मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को होनी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार को ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले की याचिका पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टाल दी। हाई कोर्ट ने कहा कि इसी समान मामले की सुनवाई लखनऊ खंडपीठ में दो न्यायाधीशों की बेंच कर रही है। ऐसी स्थिति में इस स्तर पर एकल पीठ में सुनवाई संभव नहीं है।
हाई कोर्ट में अगली सुनवाई की तिथि से पूर्व ही 19 जुलाई को ब्लाक प्रमुखों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार कार्यकाल समाप्त होने पर ब्लाक प्रमुखों को ही प्रशासक बनाने का निर्णय ले सकती है। प्रशासक रहते हुए ब्लाक प्रमुख भी रूटीन कार्यों को कर सकेंगे। विशेष स्थितियों में नीति विषयक निर्णय से संबंधित प्रस्ताव जिलाधिकारी को भेजेंगे।इनका कार्यकाल भी अधिकतम छह माह अथवा पंचायतों के सामान्य चुनाव-2026 के बाद बनने वाली क्षेत्र पंचायतों की पहली बैठक में से जो पहले होगा, तब तक के लिए होगा। उल्लेखनीय है कि पंचायती राज विभाग ने जिला पंचायत अध्यक्षों के साथ ही ब्लाक प्रमुखों को भी प्रशासक बनाए जाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय को पहले ही भेज दिया था।
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