1999 के लोकसभा चुनाव में आरएलडी और कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़कर ठाकुर अमरपाल सिंह को पराजित करने में सफल रहे अवतार सिंह भड़ाना का आजकल मेरठ प्रेम दोबारा से सामने आ रहा है। बताते हैं कि पिछले महीने भड़ाना ने अपने रॉयल होटल स्थित कार्यालय पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चौधरी यशपाल सिंह व अन्य बड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं व्यापारियों से बात की थी। तो यह अहसास तो तभी हो गया था कि २०२७ में दक्षिण विधानसभा से चुनाव या २०२९ में मेरठ से लोकसभा चुनाव लड़ने की नीति के तहत भड़ाना के मेरठ दौरों में बढ़ोत्तरी हुई लगती। बीते दिनों पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के महामंत्री अमित भड़ाना पूर्व कांग्रेेस अध्यक्ष जाहिद अंसारी, हिमांशु रमनकांत शर्मा महेंद्र उपाध्याय आदि के साथ सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के प्रकरण को लेकर धरने पर बैठी महिलाओं से मिलने पहुंचे और कहा कि न्याय और राहत दिलाने के लिए हर सीमा लाघूंगा। भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने अगर ठोस पैरवी की होती तो व्यापारियों के उजड़ने की नौबत नहीं आती। मैं किसी का घर नहीं टूटने दूंगा। चाहे मुझे मुख्यमंत्री से मिलना पड़े या उच्च न्यायालय जाना पड़े। लेकिन मैं आप लोगों को न्याय दिलाए बिना शांत नहीं बैठूंगा।
बताते चलें कि पूर्व में यहां सरधना के सपा विधायक अतुल प्रधान व्यापायिों और धरनारत महिलाओं का अपना सहयोग देने के साथ ही उनकी आवाज उठाते रहे हैं। अब कांग्रेस और सपा का गठबंधन आगामी चुनावों में भी शायद मजबूती से लड़ेगा ऐसे में न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कहने वाले अवतार सिंह भड़ाना १९९९ में कांग्रेस सरकार में मेरठ से सांसद रहे। उनके मीठे बोल और अच्छी बातों को मतदाता आज भी याद करते हैं लेकिन एक करिश्माई नेता के रुप में मेरठ आए और मेरठ मवाना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर विक्टोरिया पार्क में एक ऐतिहासिक रैली की। जिसने अवतार सिंह भड़ाना की स्थिति को मजबूत किया फिर धुंआधार चुनावी दौरे और क्षेत्रों में जाने के कारण वह भाजपा उम्मीदवार ठाकुर अमरपाल सिंह को हराने में कामयाब रहे। बताते चलें कि अवतार सिंह भड़ाना अब तक लगभग हर बड़े दल में रह चुके हैं। कांग्रेस में वापसी से पहले २००४ और २००९ में फरीदाबाद और १९९९ में मेरठ से सांसद बने और २०२२ में भाजपा के टिकट पर मीरापुर से विधायक रहे। उसके बाद सपा रालोद गठबंधन के दम पर जेवर से चुनाव मैदान में उतरे लेकिन हार गए। २०२४ में कांग्रेस में वापसी की और अब एक साल तक यहां के नागरिकों की समर्थकों के माध्यम से नब्ज टटोलते रहे भड़ाना २०२७ में दक्षिण से विधानसभा चुनाव में उतरेंगे या २०२९ में लोकसभा में चुनाव में किस्मत आजमाएंगे यह बाद की बात है लेकिन १९९९ में करिश्माई नेता के रुप में चुनाव से एक माह पूर्व मेरठ आए और चुनाव जीतने के बाद वो अपने रॉयल होटल स्थित कार्यालय में लोगों से मिलते और समर्थकों के यहां कार्यक्रमों में आते रहे लेकिन पूरे कार्यकाल में कांग्रेस की केंद्र सरकार होने के बावजूद वो मेरठ को कोई ऐसा तोहफा नहीं दे पाए जिसे नागरिक याद रख सके। शायद इसलिए वह बाद में ड्रामाई नेता भी कहलाए क्योंकि वह जहां खड़े होते हैं लोगों की भीड़ जमा हो जाती है और जब वो भाषण देते हैं तो सभी उनकी बात सुनते हैं।
१९९९ के चुनाव में उनके भाई और हरियाणा सरकार में मंत्री रहे करतार सिंह भड़ाना ने भी मेरठ में रहकर अपने भाई की चुनावी रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पूर्व में ताऊ देवीलाल की सरकार में खेलमंत्री रहे अवतार सिंह भड़ाना की राजनीतिक सोच और आगे की नीति क्या रहेगा यह कोई नहीं जानता लेकिन भड़ाना जहां भी जाते हैं उन्हें लोकप्रिय बनाने के लिए उनकी टीम पहले पहुंच जाती हैं और गुर्जर समाज में उनका सम्मान है। मेरठ दक्षिण सीट गुर्जर प्रभावित है और यहां से अब डॉ सोमेंद्र तोमर भाजपा विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। जानकारों का कहना है कि उन्हें सभी वर्गों की वोट मिली। देखना यह है कि सपा और कांग्रेस किसके हिस्से में दक्षिण विधानसभा और मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट आती है और दोनों किसे चुनाव लड़ाएंगे वो समय ही बताएगा। लेकिन यह बात कही जा सकती है कि अवतार सिंह भड़ाना चुनाव में उतरते हैं तो बड़े बड़ों की नींद उड़ा देंगे ऐसा उनके समर्थकों का कहना है। कुछ लोगों का मानना है कि सपा रालोद भाजपा कांग्रेस की नीतियों के बारे में भड़ाना बहुत कुछ जानते हैं इसलिए अपने पुराने साथी रालोद नेता वर्तमान में रालोद नेता मुकेश जैन, वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र उपाध्याय और चौधरी यशपाल सिंह नेताओं को लेकर चुनावी संग्राम को रोचक बना देंगे। वह नेताओं की गुटबंदी समाप्त कराकर अपने साथ लेकर चलने का मंत्र जानते हैं । सेंट्रल मार्केट प्रकरण की शुुरुआत से व्यापारियों के हो रहे उत्पीड़न की बात कर यहां से सत्ताधारी दल को कुछ कमजोर कर सकती है इसलिए भी अवतार सिंह भड़ाना चुनाव लड़ने के इच्छ़ुक होंगे तो उनकी दावेदारी मजबूत होगी। बाकी तो विश्वास से कोई कुछ नहीं कह सकता। सबकी अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग वाली कहावत को देखकर यही कह सकते हैं कि जीतने पर अपनी वाह वाही करेंगे और हारने पर कहेंगे कि मतदाता नहीं आए तो हम क्या करें।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- 2027 के विधानसभा और 29 के लोकसभा चुनाव से पहले पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना का मेरठ प्रेम कईयों की नींद उड़ा रहा है
- 1885 में विकसित हुआ था रैबीज का टीका! कुत्तों का प्रभाव पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गया है बचाव के उपाय आखिर तेज क्यों नहीं किए जाते
- सड़कों को टूटने से बचाना है तो अनुबंध के पूर्ण विवरण का बोर्ड शुभारंभ के समय लगाया जाए, मुख्यमंत्री का गडढामुक्त सड़क का सपना हो सकता है साकार
- भारतीय सेना शिवभक्तों के लिए बनी सुरक्षा कवच
- 10% बिजली फ्यूल सरचार्ज और गैस की महंगाई पर व्यापारियों का हल्लाबोल, राष्ट्रपति को भेजा मांग-पत्र
- इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों पर केंद्र सख्त
- जलालाबाद का नाम बदलकर अब होगा ‘परशुरामपुरी’, योगी कैबिनेट ने दी 29 में से 27 प्रस्तावों को मंजूरी
- कांग्रेस करेगी 30 दिन हिरासत में रहे मंत्रियों को हटाने सम्बंधी विधेयक का विरोध

