मेरठ 06 जुलाई (प्र)। उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ती महंगाई, घरेलू व कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के आसमान छूते दामों और हाल ही में बिजली के बिलों पर थोपे गए 10% ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) के खिलाफ व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है. उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश (पंजीकृत) ने प्रदेश के लाखों छोटे दुकानदारों, लघु व कुटीर उद्योगों तथा आम जनता की आवाज उठाते हुए महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम एक व्यापक मांग-पत्र सौंपा है.
यह मांग-पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार को जनहित में तत्काल कड़े कदम उठाने के निर्देश देने की अपील की गई है. व्यापार मंडल ने देश और प्रदेश की आर्थिक स्थिति और आम बजट के बिगड़ने का हवाला देते हुए निम्नलिखित 5 प्रमुख मांगें राष्ट्रपति के सामने रखी हैं.
इसमें उत्तर प्रदेश में बिजली के बिलों पर लगाए गए 10% ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फौरी तौर पर कमी की जाए ताकि मालभाड़ा कम हो सके. वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों के दाम कम किए जाएं, जिससे छोटे होटल व्यवसायी, ढाबा संचालक और लघु उद्योग दम न तोड़ें. आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडरों पर पर्याप्त सब्सिडी दोबारा बहाल हो और परिवहन लागत घटाकर बाजार में सब्जियों, राशन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित किया जाए जैसी मांगे शामिल हैं.
संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि आज महंगाई का सबसे घातक असर देश की रीढ़ यानी मध्यम वर्ग, छोटे व्यापारियों और निम्न आय वर्ग पर पड़ रहा है. पेट्रोल-डीजल और कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने से हर चीज की ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (परिवहन लागत) बढ़ गई है. ऊपर से उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा बिजली बिलों पर जो 10% का एक्स्ट्रा ईंधन अधिभार लगाया गया है, उसने तो छोटे कारखानों और दुकानों का मुनाफा ही खत्म कर दिया है. अगर समय रहते सरकार ने दखल नहीं दिया, तो व्यापार ठप हो जाएगा और बेरोजगारी का नया संकट खड़ा हो जाएगा.
सब्जी और राशन के थोक कारोबारियों का कहना है कि जब डीजल महंगा होता है, तो खेतों से मंडियों तक माल लाने का भाड़ा डेढ़ गुना हो जाता है. ग्राहक दुकान पर आकर मोलभाव करता है क्योंकि उसका खुद का मासिक बजट बिगड़ा हुआ है.

