Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • 2027 के विधानसभा और 29 के लोकसभा चुनाव से पहले पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना का मेरठ प्रेम कईयों की नींद उड़ा रहा है
    • 1885 में विकसित हुआ था रैबीज का टीका! कुत्तों का प्रभाव पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गया है बचाव के उपाय आखिर तेज क्यों नहीं किए जाते
    • सड़कों को टूटने से बचाना है तो अनुबंध के पूर्ण विवरण का बोर्ड शुभारंभ के समय लगाया जाए, मुख्यमंत्री का गडढामुक्त सड़क का सपना हो सकता है साकार
    • भारतीय सेना शिवभक्तों के लिए बनी सुरक्षा कवच
    • 10% बिजली फ्यूल सरचार्ज और गैस की महंगाई पर व्यापारियों का हल्लाबोल, राष्ट्रपति को भेजा मांग-पत्र
    • इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों पर केंद्र सख्त
    • जलालाबाद का नाम बदलकर अब होगा ‘परशुरामपुरी’, योगी कैबिनेट ने दी 29 में से 27 प्रस्तावों को मंजूरी
    • कांग्रेस करेगी 30 दिन हिरासत में रहे मंत्रियों को हटाने सम्बंधी विधेयक का विरोध
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»1885 में विकसित हुआ था रैबीज का टीका! कुत्तों का प्रभाव पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गया है बचाव के उपाय आखिर तेज क्यों नहीं किए जाते
    देश

    1885 में विकसित हुआ था रैबीज का टीका! कुत्तों का प्रभाव पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गया है बचाव के उपाय आखिर तेज क्यों नहीं किए जाते

    adminBy adminJuly 6, 2026No Comments2 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    आजकल मीडिया की सुर्खियों में कुत्ते बंदर सांड सहित अन्य हिंसक जानवरो की चर्चा पढ़ने सुनने को मिल ही जाता है। बताते हैं कि १८८५ से पहले भी कुत्ते आदमियों को काटते थे और घायल करते थे। १८८५ में पहली बार फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने एक बच्चें पर रैबीज वैक्सीन का प्रयोग किया जो सफल रहा। उसके बाद हमेशा छह जुलाई को विश्व जुनोसिस दिवस मनाया जाता है। लगभग १४० साल पहले रैबीज का टीका बनने के बाद भी पीड़ितों को सरकारी अस्पतालों में वो आसानी से उपलब्ध नहीं होता। बाजार में इसकी कीमत आज भी इतनी है कि गरीब आदमी उन्हें लगवाने की सोचता भी नहीं। स्मरण रहे कि आजादी के बाद हमने सुंई से लेकर हवाई जहाज बनाने शुरु किए। हर क्षेत्र में प्रगति हुई और आज हम यह कह सकते हैं कि अब हम किसी के आश्रित नहीं है। मगर कुत्तों के हमले तब के मुकाबले बढ़े हैं लेकिन इनके हमलों से आम आदमी को बचाने और रैबीज के टीके आज भी उपलब्ध नहीं होते। आखिर ऐसा क्यों है। यह जिम्मेदारों को सोचना ही पड़ेगा। बताते चलें कि अब तो हाईकोर्ट ने भी हिंसक जानवरों से आम आदमी को बचाने के लिए कई फैसले दिए गए हैं। प्रदेश सरकार भी उनका पालन करा रही है। देश में इसके लिए बजट भेजा जा रहा है लेकिन प्रभावशाली अभियान नहीं चलाए जा रहे इसलिए सरकार व अदालतों के आदेश अफसरों की लापरवाही व उदासीनता से लागू नहीं हो रहे और बड़ी संख्या में कुत्ते लोगों को अपना शिकार यह बना रहे हैँ। एक खबर के अनुसार 6 जुलाई 1885 को लुई पाश्चर ने पहली बार किसी इंसान पर रेबीज की प्रायोगिक वैक्सीन का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया। मरीज 9 साल का जोसेफ मीस्टर था, जिसे एक रेबीज-ग्रस्त कुत्ते ने बुरी तरह से 14 बार काटा था। दस दिनों में 13 इंजेक्शन लगने के बाद, वह लड़का चमत्कारिक रूप से बच गया और उसे रेबीज नहीं हुआ। इस मेडिकल कामयाबी ने टीकाकरण के आधुनिक युग की शुरुआत की। दिलचस्प है कि जोसेफ मीस्टर की मां ने पाश्चर के जानवरों पर सफल परीक्षणों के बारे में सुना था, इसलिए वह अपने बेटे को बचाने की गुहार लेकर पेरिस आई। पाश्चर ने संक्रमित खरगोशों की रीढ़ की हड्डी को सुखाकर वायरस का एक कमजोर रूप तैयार किया था। मुझे लगता है कि अब सरकार व अदालत ने तो सबकुछ कर दिया लेकिन अब जनता को गांधीवादी तरीके से अपनी बात अफसरों व सरकार तक पहुंचानी पड़ेगी कि हिंसक जानवरों के प्रकोप से बचाने के लिए प्रभावी उपाय क्यों नहीं किए जा रहे। तभी शायद इनसे पीड़ित हमारी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    2027 के विधानसभा और 29 के लोकसभा चुनाव से पहले पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना का मेरठ प्रेम कईयों की नींद उड़ा रहा है

    July 6, 2026

    सड़कों को टूटने से बचाना है तो अनुबंध के पूर्ण विवरण का बोर्ड शुभारंभ के समय लगाया जाए, मुख्यमंत्री का गडढामुक्त सड़क का सपना हो सकता है साकार

    July 6, 2026

    भारतीय सेना शिवभक्तों के लिए बनी सुरक्षा कवच

    July 6, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.