प्रदेश के मुख्यमंत्री जनता को गडढामुक्त सड़कें उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत नजर आते हैं इसके लिए अधिकारियेा को बजट भी दिया जा रहा है लेकिन सड़कें बनने के कुछ माह बाद ही टूट जाती है। निर्माण के लिए कुछ अवधि तय होती है जिसके अंदर टूटने पर ठेकेदार ही ठीक कराएगा लेकिन अब आज सड़क बनती है और कुछ माह बाद वह टूट जाती है। मेरा मानना है कि सड़क के निर्माण के समय उदघाटन के साथ ही एक बोर्ड लगाकर बताया जाए कि सड़क की अवधि क्या है किसने इसे बनाया और कितना बजट खर्च हुआ। इस तरफ अफसर ध्यान देकर हिसाब रखें और सड़क टूटने या गडढा होने पर लोग ठेकेदार से भी पूछ सकते हैं कि यह क्यों टूटी इसे सही कराओ। र्बोउ पर निर्माण में लगी सामग्री का भी हिसाब हो।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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