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    Home»न्यूज़»कानपुर से फर्जी मार्कशीट बनाकर बेचने वाले गिरोह को किया बेनकाब, 4 गिरफ्तार
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    कानपुर से फर्जी मार्कशीट बनाकर बेचने वाले गिरोह को किया बेनकाब, 4 गिरफ्तार

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 10, 2026No Comments4 Views
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    कानपुर, 10 जून (ता)। फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बनाकर बेचने वाले गिरोह का एक और नेटवर्क गत रात कानपुर पुलिस ने ध्वस्त किया। डीसीपी सेंट्रल की सर्विलांस टीम और बेकनगंज थाना पुलिस ने हीरामन का पुरवा के एक मकान से विभिन्न विद्यालयों की मार्कशीट-डिग्रियां छापने वाले गिरोह के सरगना समेत चार आरोपितों को धर दबोचा। गिरोह 13 साल से फर्जी मार्कशीट-डिग्रियां छाप रहा था। गिरोह के सरगना के पास यूके का पासपोर्ट-वीजा भी मिला। वह पूर्व में दो बार लंदन में जाकर एक डिपार्टमेंट स्टोर में भी काम कर चुकी है, जहां से भी सरगना ने अपना नेटवर्क फैलाते हुए लंदन, कनाडा, सऊदी, दुबई और भारत के कई राज्यों में जाल फैला चुका था। वह विदेशों में काम करने वाले भारतीय मूल के लोगों को मार्कशीट-डिग्रियों की पीडीएफ बनाकर वाट्सएप भी भेजते थे। बाद में उसकी प्रति कुरियर से भिजवाते थे। सरगना समेत आरोपितों का कनेक्शन पूर्व में पकड़े गए गिरोह से मिला है।
    गिरोह के बीच एक करोड़ से अधिक का लेनदेन भी खातों में पाया गया है। सरगना लंदन का मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर लोगों से डील करता था। डिग्रियां छापने के बाद उसे निजी कुरियर कंपनी से भेजी जाती थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 में एसटीएफ ने हैदराबाद से सरगना को फर्जी डिग्री बनाने में ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने कहा कि 18 फरवरी को जूही गौशाला स्थित शैल ग्रुप आफ एजुकेशन के कार्यालय से फर्जी मार्कशीट-डिग्रियां बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। इसमें सरगना रायबरेली के ऊंचाहार नन्हकू का पुरवा निवासी व हाल पता साकेत नगर के शैलेन्द्र कुमार ओझा, कौशांबी के चरवा थाना क्षेत्र निवासी नागेन्द्र मणि त्रिपाठी, उत्तरी पश्चिम दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-5 व हालपता गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी जोगेन्द्र और उन्नाव के गंगाघाट शुक्लागंज निवासी अश्वनी कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था।
    उनके कार्यालय से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, झारखंड, मणिपुर, सिक्किम राज्य के 14 विश्वविद्यालय व माध्यमिक शिक्षा परिषद से 1030 फर्जी डिग्री व मार्कशीट बरामद की थीं। इसके बाद एसआइटी ने गिरोह के सदसय नोएडा-37 निवासी विनीत कुमार, चमनगंज निवासी मो. अजरुद्दीन, हैदराबाद के हिमायत नगर नारायणगुडा निवासी मनीष कुमार उर्फ रवि, उन्नाव निवासी अर्जुन यादव और फरीदाबाद के अनंगपुर निवासी राघव सर्राफ को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
    इसके बाद चार जून को गिरोह के 10वें आरोपित गाजियाबाद के प्रकाश विहार लोनी निवासी मयंक भारद्वाज को कौशांबी अंसल प्लाजा के पास से गिरफ्तार कर अगले दिन जेल भेजा था। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही थी। इस दौरान शैलेंद्र और राघव सर्राफ के बैंक खातों की जांच में सामने आया कि हीरामन का पुरवा निवासी हसन आसिफ के खाते में 40 हजार रुपये और आमिर अहमद के बैंक खाते में लगभग एक करोड़ का लेनदेन मिला।
    रंगे हाथ जियाउल को पकड़ा
    पुलिस टीम ने जब आमिर से पूछताछ की तो उसने कहा कि वह जेके आइटीआइ में टेक्नीशियन है, लेकिन जियाउल से पुराना संपर्क है और उसके इस काम को वह बहुत पहले से जानता है। उसने पूरे गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कहा कि हसन का भाई जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ ने ही उसके और हसन के खाते में रुपये मंगवाए थे। इसके बाद आमिर पर निगरानी रखते हुए पुलिस टीम ने जियाउल को रंगेहाथ दबोचने की योजना बनाई। इसके बाद गत दिवस सर्विलांस और बेकनगंज थाने की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर जियाउल के हीरामन का पुरवा स्थित मकान में छापा मारा और जियाउल, हसन, नूरद्दीन को दबोच लिया। आरोपित मार्कशीट-डिग्रियां कंप्यूटर और लैपटाप से बनाते हुए और प्रिंट निकलवाते हुए मिले थे।
    पुलिस आयुक्त ने कहा कि 32 वर्षीय जियाउल हसन बीबीए करने के बाद ग्राफिक्स का कोर्स भी किया था। वह फर्जी मार्कशीट-डिग्रियां को विभिन्न विश्वविद्यालयों का प्रारूप तैयार करने के लिए ग्राफिक्स (डिजाइन) बनाता था। साथ ही थ्रीडी मोनाग्राम व होलोग्राम भी बनाता था, जो देखने में विश्वविद्यालय का ओरिजन दिखता था। उसकी बनावट व मोटाई एक जैसी लगती है। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा परीषद की हाईस्कूल इंटर, बीए-बीएससी की मार्कशीट पांचवीं पास नूरद्दीन तो पीएचडी की डिग्री आमिर बनाता था।

    Fraud Gang selling forged marksheets busted in Kanpur; 4 arrested. kanpur Uttar Pradesh
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