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    Home»देश»दिल्ली का जीमखाना क्लब जैसा कोई संकट एलेक्जेडर क्लब और मेरठ क्लब पर ना आये इसलिए पदाधिकारियों को सोच समझकर निर्णय लेने होंगे, मैसोनिक लॉज के बराबर की जमीन हुई खाली
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    दिल्ली का जीमखाना क्लब जैसा कोई संकट एलेक्जेडर क्लब और मेरठ क्लब पर ना आये इसलिए पदाधिकारियों को सोच समझकर निर्णय लेने होंगे, मैसोनिक लॉज के बराबर की जमीन हुई खाली

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMay 27, 2026No Comments79 Views
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    मेरठ, 27 मई (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। किसी जमाने में केंद्र तथा जिलों में सरकार द्वारा लीज पर सार्वजनिक कार्यों के लिए दी गयी भूमि अब धीरे-धीरे वापस लेने का जो सिलसिला शुरू हुआ है उसको देखते हुए अब आम जनमानस से संबंध जो क्लब संस्थाएं, सरकार की जमीन पर संचालित हैं उन्हें बहुत संभलकर चलने की आवश्यकता है क्योंकि छोटी-छोटी बातों पर सरकार और विभाग अपनी जमीनें वापस लेने या अधिकृत करने में लगे हैं और ऐसा करने वालों का मत है कि अब अन्य जरूरी कार्यों के लिए जो जमीन हमारी है वह चाहिए और वह ले भी रहे हैं।

    नया मामला दिल्ली जीमखाना क्लब जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण संस्था है उसे खाली कराने के पूरे प्रयास चल रहे हैं कल क्या होगा वह तो बात और है लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर बहुत बड़ा निर्णय नहीं हुआ तो 2026 में ही जीमखाना क्लब सरकार के अंतर्गत आ जाएगा जिसका संचालन भी उसके द्वारा ही किया जायेगा।
    दूसरी तरफ कैंट क्षेत्र में स्थित व्हीलर्स क्लब जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण सैनिकों और सिविलियन की गतिविधियों का केंद्र है उसके पास स्टेट बैंक के सामने मैसोनिक लॉज के निकट जो जमीन थी वह रक्षा संपदा अधिकारी द्वारा अपने कब्जे में ले ली गयी या ली जा रही बताई जाती है

    बताते चलें कि शहर के प्रमुख नागरिकों का क्लब एलेक्जेंडर भी जानकारों के अनुसार इस कार्य के तहत आ सकता है क्योंकि जानकारों का कहना है कि जब यहां अखंड प्रताप सिंह डीएम और अजय राज शर्मा जी एसएसपी थे तो उनके द्वारा क्लब का काफी हिस्सा खाली कराकर पुलिस ऑफिस के बराबर से कचहरी के अंदर आने वाले मार्ग पर जो डिप्टी रजिस्ट्रार और ट्रेजरी जिसका निर्माण करा दिया गया था इसके चलते क्लब की लगभग 30 प्रतिशत जमीन चली गयी।
    अब जो कमेटियां पहले थी और अब हैं उनके पदाधिकारियों द्वारा काफी अच्छे कार्य किये गये और करे जा रहे हैं वह बात और है कि नई चुनकर आई कमेटी ने अपने वायदों में और जनरल हाउस की बैठकों में कहा था कि हम टेम्परेरी सदस्य नहीं बनायेंगे लेकिन उनके द्वारा पहले से भी ज्यादा टेम्परेरी सदस्य बना दिये गये और वह भी निर्धारित शुल्क से कम में बनाये गये ऐसा क्यों किया गया यह तो क्लब संचालक ही जाने परन्तु जानकारों का कहना है कि इस बात को भी मुद्दा बनाकर अगर प्रशासन चाहेगा तो क्लब को खाली कराकर किसी अन्य स्थान पर भेजा जा सकता है। इसलिए क्लब की जो वर्तमान कमेटी है वह करोड़ों रूपये खर्च कर जो क्लब कम्पाउंड में विभिन्न कार्यों के लिए निर्माण और बहुमंजिला ईमारत बनाना चाहता है उसे देखभाल और सोचसमझकर यह कार्य शुरू करना चाहिए क्योंकि अगर निर्माण में जरा सी भी कोई कमी या मानचित्र के विपरीत बन गयी तो दूसरा मुद्दा खाली कराने का बन सकता है। अब कुछ लोगों का कहना है कि क्लब के जिलाधिकारी अध्यक्ष है तो इस बारे में कई सदस्यों का मानना है कि डीएम साहब अध्यक्ष हो होते हैं मगर वह किसी भी गलत काम में क्लब के साथ नहीं है इसके उदाहरण के रूप में कुछ वर्ष पूर्व क्लब के पदाधिकारियों द्वारा बनाये गये 100 से ऊपर मेम्बर लेकिन जब किसी सदस्य द्वारा इसकी शिकायत की गयी तो डिप्टी रजिस्टार चिटफंड से जांच करायी गयी और कमियां पाने पर उस समय के डीएम विकास गोठलवाल द्वारा सभी बनाये गये मेंबरों की सदस्यता निरस्त कर दी गयी थी। और इस मामले में सिटी मजिट्रेट द्वारा क्लब की कमेटी के गलत कार्यों के खिलाफ ही रिपोर्ट दी गयी थी।

    इसलिए सदस्यों का मानना है कि वर्तमान कमेटी जो भी निर्णय ले उसके लिए जनरल हाउस की बैठक बुलाये जिससे अगर कभी कोई परेशानी पड़ती है तो कोई भी सदस्य यह ना कह पाये कि यह पदाधिकारियों की धीनामुस्ती के कारण हुआ क्लब को नुकसान और वैसे भी अब कई सरकारी अधिकारियों के लिए जो कलेक्ट्रट कम्पाउंड में ही बैठने चाहिए जगह की बड़ी आवश्यकता है उसके आधार पर जिला प्रशासन चाहेगा तो अब जब जमीन की लीज निरस्त कर अपने कब्जे में ले सकता है। इसलिए कुछ वरिष्ठ सदस्योें का मानना है कि क्लब के पदाधिकारियों को हर कदम बहुत सूझबूझ के साथ उठाना और निर्णय लेना चाहिए क्योंकि जरा सी भी गलती और उसकी शिकायत वर्तमान कमेटी के लिए भारी पड़ सकती है। क्योंकि अब वह जमाना नहीं है कि क्लब के पूर्व सचिव मुकेश गुप्ता द्वारा अपने कार्यकाल में जो क्लब के पैसे का दुरूपयोग किया गया। वैसा ना तो वर्तमान कमेटी करेगी और ना ही हो सकता है। कुल मिलाकर कहने का आशय क्लब के हित में यह है कि पदाधिकारियों को टेम्परेरी और स्थायी सदस्य बनाने के साथ ही निर्माण कार्य या कोई और फैसला लेने से पूर्व हर बिन्दु पर आपस में फैसला कर तय किया जाना चाहिए और अगर कोई बड़ा मुद्दा है तो जनरल हाउस की बैठक बुलाकर उसमें निर्णय लिया जाये।

    स्मरण रहे कि ऐसा ही कुछ मवाना रोड स्थित मेरठ क्लब का भी मामला है क्योंकि जब भारत भारती के राजेन्द्र अग्रवाल स्टेडियम के दो कमरों में मेरठ क्लब चलाते थे। जहां से उन्हें हटाया गया फिर कचहरी स्थित सैनिक भवन में दो कमरे दिये गये वह भी बाद में खाली करने पड़े तब उस समय के मंडलायुक्त एचएल बिरदी और जिलाधिकारी एसएन सेठ के द्वारा खेलों को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से रक्षा पुरम में जो पार्क और खेल मैदान की जमीन थी उसमें से लगभग आधी लेकर उसमें मेरठ क्लब स्थापित कर दिया गया और जानकारों के अनुसार वह भी लीज पर तो है ही खेल और पार्क की जमीन पर स्थापित है इसलिए यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि कभी भी अगर सरकारी विभाग को जगह की आवश्यकता होगी या खिलाड़ियों द्वारा मांग की गयी तो सरकार की खेल प्रेम की भावना के चलते इसे भी खाली कराये जाने में कोई परेशानी नहीं होगी।

    अब अगर कोई कहे कि मेरठ क्लब के अध्यक्ष तो मंडलायुक्त जी है और एलेक्जेडर के जिलाधिकारी तो यह बात साफ है कि सरकारी कार्यों की आवश्यकता होने पर वह इसके खाली होने पर कोई पैरवी इसे बचाये रखने के लिए शायद नहीं करेंगे क्योंकि सरकार का निर्णय सर्वोपरि होगा और ऐसा ही ऐसे मामलों में हो रहा है क्योंकि दिल्ली का जीमखाना क्लब प्रभावशाली व्यक्तियों की संस्था है मगर अब उस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं इतना ही नहीं व्हीलर क्लब की जो खाली पड़ी जमीन अधिकृत की गयी है या की जा रही है उसमें भी अधिकारियों द्वारा कोई निर्णय सरकार की नीति के विरूद्ध नहीं लिया गया। इसलिए मेरठ क्लब हो या एलेक्जेंडर इसके पदाधिकारियों को कोई भी निर्णय सोच समझकर लेना होगा क्योंकि उनका कोई भी गलत फैसला भारी पड़ सकता है।

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