ऋषिकेश, 21 मई (ता)। ऋषिकेश की पावन भूमि आज एक अद्भुत आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता के दृश्य की साक्षी बनी, जब हेमकुण्ड साहिब यात्रा के लिये श्रद्धालुओं की संगत को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस विशेष अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल रणजीत सिंह संधू और स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने पंच प्यारों का अभिनंदन कर उन्हें श्रद्धा, सम्मान और भावपूर्ण विदाई दी। बिन्द्रा और गुरूद्वारा हेमकुण्ड साहेब पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों का अभिनन्दन किया।
भारत की आध्यात्मिक चेतना, सेवा परंपरा और राष्ट्रीय एकता का जीवंत उत्सव जहां गुरबाणी की पावन ध्वनि, जो बोले सो निहाल के जयघोषों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने आशीर्वचन में कहा कि हेमकुण्ड साहिब केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि तप, त्याग, सेवा और साहस की दिव्य भूमि है। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह का जीवन सम्पूर्ण मानवता के लिये प्रेरणा है। गुरु साहिब ने धर्म, मानवता और न्याय की रक्षा के लिये अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उनके जीवन का प्रत्येक अध्याय साहस, करुणा और आध्यात्मिक तेज से ओतप्रोत है। स्वामी ने कहा कि आज जब दुनिया संघर्ष, हिंसा और विभाजन से जूझ रही है, तब गुरु गोबिंद सिंह
का संदेश मानवता को जोड़ने, निर्भय बनने और धर्म के लिये खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि यात्रा केवल पर्वतों की चढ़ाई नहीं, बल्कि अपने भीतर की यात्रा भी है।
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