लखनऊ 07 मई। उत्तर प्रदेश के पारंपरिक स्वाद अब नई पहचान के साथ देश-दुनिया में छाने की तैयारी में हैं। प्रदेश सरकार ने ‘एक जनपद एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना के तहत प्रदेश के 75 जिलों के प्रमुख व्यंजनों की व्यापक मैपिंग पूरी कर ली है।
इस पहल के साथ बागपत का घेवर, मेरठ की गजक व रेवड़ी, सहारनपुर के शहद उत्पाद, मुजफ्फरनगर का गुड़ और शामली की गुड़ आधारित मिठाई अब सिर्फ स्थानीय स्वाद नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें ब्रांड बनाकर बड़े बाजार तक पहुंचाने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। एक जिला एक व्यंजन का शासनादेश भी जारी हो गया है। हालांकि इस सूची में राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़े तमाम मशहूर मांसाहारी व्यंजनों को जगह नहीं मिली है।
ओडीओपी की सफलता के बाद शुरू की गई इस योजना का मकसद हर जिले की खानपान परंपरा को पहचान देना और उसे आर्थिक गतिविधि से जोड़ना है। इसके तहत जौनपुर की इमरती और एटम बम, कानपुर का समोसा, आगरा का पेठा, वाराणसी की लस्सी, गाजियाबाद की सोया चाप, गौतम बुद्ध नगर के बेकरी उत्पाद, हापुड़ के पापड़, बुलंदशहर की कचौरी, बिजनौर के सिंघाड़ा कचौरी, मुरादाबाद की दाल और लखनऊ मलाई मक्खन जैसे व्यंजनों को प्रमुख पहचान दी गई है।
सरकार की योजना है कि ब्रज की मिठास, अवध की कचौड़ी समोसा परंपरा, पूर्वांचल के देसी स्वाद और बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजनों को एक मंच पर लाकर ‘टेस्ट ऑफ यूपी के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इससे प्रदेश के खानपान की विविधता को एकीकृत पहचान मिलेगी और हर जिले की अलग पू आइडेंटिटी मजबूत होगी।
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय स्तर पर काम कर रहे हलवाई, कारीगर और छोटे फूड कारोबारियों को मिलेगा। पारंपरिक व्यंजनों की मांग बढ़ने से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि छोटे व्यवसायों को भी नई मजबूती मिलेगी। ओडीओसी योजना को पर्यटन से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

