पहले नोबल पुरस्कार विजेता एक व्यापारी परिवार से संबंध युद्ध में घायल हुए लोगों की दयनीय स्थिति को देखते हुए हेन्टी ट्रुनांट द्वारा १८६३ में स्थापित रेडक्रास सोसायटी की स्थापना की गई थी। आज हम रेडक्रास दिवस हम मना रहे हैं। बताते चलें कि आकस्मिक आपदा आदि होने पर जनसेवा और जरुरतमंदों को राहत पहुंचाने के मामले में दुनियाभर में विश्वसनीय और सक्रिय रेडक्रास सोसायटी का हर साल आठ मई को दिवस मनाया जाता है।
पूरी दुनिया के साथ साथ देश में भी इस संगठन का बउ़ा महत्व और इससे जुड़े सदस्यों की प्रतिष्ठा कायम है। तमाम जिला मुख्यालयों पर इसके कार्यालय है और कार्यकर्ता सेवाभाव से काम करने के लिए सक्रिय नजर आते हैं। देश में जानकारी अनुसार राष्ट्रपति इसकी अध्यक्ष और प्रदेश में राज्यपाल तथा जिलों में जिलाधिकारी होते हैं। इस कारण से इस संगठन का महत्व और भी बढ़ जाती है और पीड़ितों को इसके माध्यम से राहत मिलेगी यह उम्मीद की जाती है।
लेकिन अपने जिले में पिछले कुछ सालों में रेडक्रास सोसायटी आम आदमी में गुमनाम होती जा रही है। जिन लोगों का इससे काम पड़ता है वो ही इसे जानते हैं। क्योंकि ना तो वर्तमान में कहीं इसके शिविर लगते हैं और ना ही स्कूलों में बच्चों को इसके बारे में बताने के लिए कैंप लगते हैं। बताते चलें कि हर स्कूल से प्रति छात्र के हिसाब से वार्षिक शुल्क पहले आता था अब कितना आ रहा है वो जानकारों को पता है। लेकिन ना तो इसके समय से इसके चुनाव होते हैं और ना ही बैठकें हो रही बताई जाती है। हर साल खानापूर्ति के लिए रेडक्रास दिवस मनाया जाता है क्योंकि नागरिकों की बात तो दूर इसके पूर्व पदाधिकारियों को इसके आयोजन में आमंत्रित नहीं किया जाता। स्मरण रहे कि सोसाइटी के कार्य
आपदा राहतरू भूकंप, बाढ़, अकाल, और महामारी जैसी प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं के समय प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना
आपातकालीन चिकित्सा सेवारू युद्ध या दुर्घटना की स्थिति में घायल सैनिकों और नागरिकों को सहायता, नर्सिंग और एम्बुलेंस सेवाएं प्रदान करना
स्वास्थ्य और कल्याणरू मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र चलाना और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना
प्रशिक्षणरू आम जनता और युवाओं को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देना
मानवीय सहायतारू कमजोर वर्गों, शरणार्थियों और युद्धबंदियों को भोजन, वस्त्र और वस्तुएं उपलब्ध कराना
संस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन्य का हिस्सा है, जो स्वास्थ्य की रक्षा, जीवन की सुरक्षा और मानव गरिमा को बनाए रखने के लिए काम करती है।
क्योंकि जिलाधिकारी के पास बहुत काम होते हैें इसलिए वो इस बारे में पूरा समय दे पाएं यह संभव नहीं है लेकिन इसकी कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों को जितनी सक्रियता चुनाव लड़ने के लिए दिखाई जाती है उतनी अगर इसके नियमित संचालन और उददेश्यों को पूरा करने में दिखाई जाए तो यह विश्वास से कहा जा सकता है कि इस संगठन के स्थापना और उददेश्यों के माध्यम से जनता को राहत मिल सकती है। वर्तमान में अगर किसी का रोजाना फोन भी इनके पास आता है तो वो रक्त दिलाने के लिए ही आता है। क्योंकि इससे संबंध चिकित्साधिकारी भी जानकारों के अनुसार इससे संबंध सुविधाएं भोगने की कोशिश तो करती है लेकिन इसकी विश्वसनीयता बनाने के लिए प्रयास नहीं किए जाते।
समाज के विभिन्न क्षेत्रों में आ रही जागरुकता के क्रम में नए आविश्कार आ रहे है इस संबंध में एक खबर पढ़ी कि आ गया है खून बढ़ाने वाला सहजन का बिस्कुट हो सकता है यह सही हो लेकिन समाज में रक्त की आपूर्ति रक्तदान से ही हो सकती है इसलिए जिलाधिकारी को इस बारे में एक आदेश करना चाहिए कि वर्तमान कमेटी के सदस्य व पदाधिकारी जागरुकता के लिए स्कूलों में सक्रियता दिखाए और माह में एक बार दो रक्तदान शिविर जरुर लगाएं जिसमें जिला चिकित्साधिकारी और अन्य सहयोग करें जिससे मानवयीयता से परिपूर्ण उददेश्यों का कार्य पूरा हो सके।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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