नई दिल्ली 07 फरवरी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोगों को राहत देने के लिए विशेष प्रावधान के रूप में अधिकतम 25 हजार रुपये तक का मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा है। छोटे स्तर की धोखाधड़ी वाले मामलों को इसके दायरे में रखा जाएगा।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को बताया कि यह क्षतिपूर्ति उन मामलों में भी दी जाएगी जहां ग्राहक गलती से ओटीपी धोखेबाजों से साझा कर देते हैं। उन्होंने कहा, ठगी के शिकार लोगों को बिना सवाल किए 85% राशि (25 हजार रुपये तक) लौटाई जाएगी। 15% नुकसान पीड़ित को उठाना होगा जबकि 15% संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि आरबीआई देगा।
यह राशि 85 हजार करोड़ रुपये के जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष से दी जाएगी। इसी तरह ई-भुगतान में धोखाधड़ी रोकने के लिए विलंबित भुगतान, बुजुर्गों और अन्य विशेष श्रेणी के ग्राहकों के लिए अतिरिक्त सत्यापन की व्यवस्था की जा सकती है।
रेपो दर में बदलाव नहीं
इससे पहले रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा की बैठक के बाद रेपो दरों में बदलाव नहीं किया। यानी ऋण की किस्त में बदलाव नहीं होगा। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड, बैंक योजनाओं की समीक्षा और बिना गारंटी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की ऋण सीमा 20 लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है।
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि ग्राहकों की सुरक्षा के लिए तीन मसौदा नियम जारी होंगे। पहला, गलत तरीके से उत्पाद बेचने, दूसरा कर्ज वसूली व वसूली एजेंटों के कामकाज जबकि तीसरा ऑनलाइन लेनदेन में ग्राहकों की जिम्मेदारी सीमित करने से जुड़ा होगा।
धोखाधड़ी पर सिर्फ एक बार ही मिलेगा लाभ
साइबर धोखाधड़ी पर मुआवजे का लाभ सिर्फ एक बार मिलेगा। इसके लिए सिस्टम बनाया जाएगा, जिससे यह पता लग सकेगा कि किसी ने पहले सुविधा का लाभ न लिया हो। वर्तमान में 50 हजार रुपये तक की राशि वाले मामले 65% हैं।
रिकवरी एजेंट को लेकर भी होंगे सख्त प्रावधान
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि ऋण वसूली के लिए रिकवरी एजेंटों से संबंधित दिशानिर्देश जारी किया जाएगा। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा उनके काउंटर पर तीसरे पक्ष के उत्पादों के विज्ञापन, विपणन और बिक्री के नियमन पर भी नियम बनेंगे।

