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    Home»देश»सरकारी कर्मचारियों की बढ़ती छुट्टियां बन सकती है परिवारों में मनमुटाव का कारण, हतोत्साहित हो सकते हैं असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले
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    सरकारी कर्मचारियों की बढ़ती छुट्टियां बन सकती है परिवारों में मनमुटाव का कारण, हतोत्साहित हो सकते हैं असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले

    adminBy adminFebruary 28, 2026No Comments11 Views
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    प्रेम, प्यार और सद्भाव के प्रतीक त्यौहारों पर परिवारों में खुशहाली के लिए पैसे की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए होली पर आज सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को वेतन दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को बधाई और शुभकामनाएं दी ही जानी चाहिए।
    मगर समाज के असंगठित क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों की आवश्यकताओं और भावनाओं को ध्यान में न रख सरकारी छुट्टियों की संख्या अगर बढ़ती रही और दफ्तरों में काम न होने से जो आम आदमी की सोच बनती है वह परिवारों के लिए कठिनाईयों का कारण बन सकती है क्योंकि शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जहां अगर दो भाई हैं एक बहुत सुविधाजनक व्यवस्थाएं भोग रहा है और दूसरा कठिनाई में हैं तो कहीं न कहीं यह सोच जरूर उत्पन्न होती है कि आखिर मेरा क्या कुसूर है माननीय सीएम साहब जो सरकारी छुट्टियों की संख्या बढ़ रही है उसे लेकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग और व्यापारी वर्ग जो 24 में से 16 घंटे काम करा है ना तो उसे सरकार की तरफ से कोई सुविधा मिल रही है और ना ही कोई आकस्मिक आपदा आने पर पूर्ण रूप से व्यवस्था में मदद की नहीं है। ऐसे में सोच में फर्क आने में भाई-भाई में मनमुटाव बढ़ते देर नहीं लगती। अनेकों मौकों पर बच्चे यह कहते सुने जाते हैं कि चाचा और ताऊ जी के यहां इतनी सुविधाएं है और हम तमाम परेशानियां झेल रहे हैं वह जब चाहे जब घर आ जाते हैं और घूमने निकल जाते हैं लेकिन हम घर में पड़े पड़े अभाव झेलने के लिए ही क्यों हैं।
    अब अगर सरकार इस तरफ छुट्टियां बढ़ाती है तो उसका जो सपना और उद्योगों को बढ़ाने की नीति है उसके प्रभावित होते देर नहीं लगेगी और इसके प्रमाण के रूप में सरकारी स्तर पर चलने वाले उद्योग धंधों की हर प्रकार की स्थिति को देखकर अंदाज लगाया जा सकता है क्योंकि त्यादातर कम या ज्यादा नुकसान में सरकार की मदद से ही आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए ऐसा भी होना संभव नहीं है अब जहां तक मुफ्त की रेवड़ियां बांटे जाने के सवाल उठ रहे हैं उन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और अगर सरकार चाहे तो भी सब को इतनी आर्थिक मदद नहीं दे सकती जिससे परिवारो को पालन-पोषण अपने परिवार के सरकारी नौकरियों में मौजूद रिश्तेदारो द्वारा सुविधाएं भुगती जा रही हैं।
    मेरा मानना है कि देश के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए सरकारी नौकरियों में छुट्टियों की संख्या कम की जाये और जिस प्रकार से समय-समय पर इनका वेतन बढ़ाते हुए बोनस आदि दिये जाते हैं वैसी ही कुछ आर्थिक सहायता असंगठित क्षेत्र के लोगों और छोटे एवं मध्यम दर्जे के व्यापारियों को भी उपलब्ध कराई जाये और अगर ऐसा आसानी से संभव न हो तो परिवारों में मनमुटाव न बढ़े इस बात का ध्यान रखते हुए सरकारी नौकरियों में अवकाश बढ़ाने के बजाये कुछ कम किये जाने चाहिए राष्ट्रहित में।
    (प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)

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