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    Home»देश»उत्साह से हु़ई शादी जल्द ही तलाक तक क्यों पहुंच रही है हम सबको सोचना होगा, बच्चों का रिश्ता तय करते हुए एक दूसरे से कुछ छिपाए नहीं सात जन्म का संबंध
    देश

    उत्साह से हु़ई शादी जल्द ही तलाक तक क्यों पहुंच रही है हम सबको सोचना होगा, बच्चों का रिश्ता तय करते हुए एक दूसरे से कुछ छिपाए नहीं सात जन्म का संबंध

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comFebruary 28, 2026No Comments7 Views
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    Indian couple holding hand close up in wedding ceremony.
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    हजारों से लेकर अरबो रुपये तक खर्च कर सात जन्म के संकल्प निभाने के साथ नाचने गाने के बीच संपन्न हो रही शादियां आखिर कौन से कारण हे कि अब होने से ज्यादा तलाक के मामले एक डेढ़ साल में पहुुंचने लगे हैं। जाानकारों के अनुसार काउंसिलिंग के बाद भी कुछ ही जोड़े आपसी सहमति से साथ रहने को तैयार होते हैं लेकिन ज्यादातर अपने फैसले पर अडिग रहकर अलग राह चुनना पसंद करते हैं। एक खबर के अनुसार वाराणसी में बीते दिसंबर तक ३६५ दिन में १५०० शादियां हुई लेकिन कोर्ट में २२५० मामले तलाक के पहुंच गए। इनकी रफ्तार का उदाहरण यह है कि बीते जनवरी में ७०, फरवरी
    नवंबर में ४३ और दिसंबर में ८७ सहित ८३३ मामलों का निस्तारण हुआ। सवाल उठता है कि देश में वैवाहिक पद्धति आर्य समाज और सनातन पद्धति अपनाते हुए जो शादियां हो रही है। इनमें काफी लव मैरिज होती हैं। सवाल उठता है कि जब युवा आपसी सहमति से शादी करते हैं तो इतनी जल्दी उसे तोड़ने की ओर क्येां जा रहे हैं। बताते हैं कि कितने दंपत्ति एक डेढ साल में अलगाव की राह पकड़ते हैं। कई ऐसे मामले भी है लेकिन उन्हें सिद्धांत के अनुरुप नहीं कह सकते क्योंकि ८० साल में भी तलाक हो रहे हैं।
    सवाल उठता है कि भारतीय सामाजिक परिवेश हमें मां बाप के सम्मान बच्चों के भविष्य को लेकर लंबे समय तक चलने वाले वैवाहिक संबंध ऐसा क्या हुआ कि बिखराव की ओर चल पड़े। जहां तक मुझे लगता है कि कई मामलों में परिवार के लोग संतान की जल्द शादी करने के चक्कर में बेटी के संस्कारी होने और बेटे की कमाई तनख्वाह से ज्यादा बताकर तो कभी दोनों के प्रेम संबंधों को छिपाकर या बच्चों की आदतों या बीमारी ना बताकर शादी कर देते हैं यह भी तलाक के कारण हो सकते हैं लेकिन कोर्ट में जो मामले पहुंचते हैं उनमें नपुंसकता दहेज प्रताड़ना, आर्थिक मांग और उत्पीड़न के आरोप या शादी के बाद पुरानें संबंधों को निभाना तलाक के कारण बन रहे हैं। जो पति पत्नी और बच्चों की हत्याएं होने के लिए भी यही बातें दोषी हैं क्योंकि अलग हो गए तो ठीक वरना लोकलाज या सोच के अनुरुप माहौल ना होने से चिडपिड़ापन होने से इस तरह की हत्याओं को नकारा नहीं जा सकता।
    समाज में पनप रही गलत व्यवस्था पर रोक के लिए मुझे लगता है कि संतान का कहीं प्रेम संबंध चल रहा है और समझाने के बाद भी ना माने तो उन्हें शादी की अनुमति दी जाए। 2 विवाह तय करने के साथ संतान की आदतों और कमियों के बारे में सही जानकारी दी जाए। अ गर कोई कमी है तो उसे छिपाना नहीं चाहिए। एक दूसरे को इतने सब्जबाग दिखाए जाएं हो पूरे हो जाए। कुंडली मिलाने के स्थान पर अब उनकी डॉक्टरी कराकर एक दूसरे को रिपोर्ट दिखाई जाए और अगर शादी हो जाए तो यह कह सकता हूं कि तलाक के मामलों में कमी आ सकती है। युवा यह कोशिश करते हैं कि उनकी शादी ना टूटे और क्लेश ना हो जिससे बच्चों पर गलत असर ना पड़े। बाकी जो होना है वो तो होगा ही । ३६ गुण मिलाने वाली शादियां भी टूट रही हैं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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