Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • भारत ने 2028-29 UNSC अस्थायी सदस्यता के लिए दावेदारी की पेश, जयशंकर ने दिया शांति का मंत्र
    • US-ईरान युद्ध : मार्च 2026 से अब तक खाड़ी इलाके में 13 भारतीयों की मौत, 3 लापता
    • ‘तुम्बाड 2’ में आलिया भट्ट के आने से फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट और बढ़ गई
    • महंगाई व आम जनता के दर्द पर कब बोलेंगे पीएम मोदी : जयराम रमेश
    • बिना मुकदमे हिरासत में रखने संबंधी बंगाल में बने कानून इमरजेंसी की याद दिलाता है
    • 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव भाजपा के 3 उम्मीदवारों ने भरा पर्चा
    • उमर अब्दुल्ला को भाजपा ने भेजा मानहानि का नोटिस
    • राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»विश्व सैर सपाटा दिवस, डॉ तनुराज सिरोही की राय, आम आदमी की संतुलित जीवनशैली हर तरीके से तय कर सकती है समाधान
    देश

    विश्व सैर सपाटा दिवस, डॉ तनुराज सिरोही की राय, आम आदमी की संतुलित जीवनशैली हर तरीके से तय कर सकती है समाधान

    adminBy adminJune 19, 2026No Comments10 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। भूगर्भ जलस्तर घट रहा है। धरती और पानी के बढ़ते दोहन से और भी स्थिति खराब हो रही है लेकिन अभी कोई इस बारे में सोचने को गंभीरता से तैयार नहीं है। इस नाम पर सम्मेलनों में बड़ी बातें की जाती है। नदियों नालों की सफाई की जाती है लेकिन स्थिति फिर बद से बदतर होती नजर आती है लेकिन पानी की कमी का रोना वाले लोग ही सबसे ज्यादा पानी की बर्बादी करते हैं। आज एक खबर पढ़ी कि दिल्ली में फिर होगी कृत्रिम बारिश। अब दिल्ली इतनी बड़ी है कि शहरी क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च कर बारिश ना पाए। कुछ वीआईपी इलाकों में ऐसा कर दावा किया जाए कि प्रदूषण और गर्मी में कमी के लिए कृत्रिम बारिश कराई गई। वर्तमान में गंगाजल गर्म हो रहा है और हालात बिगड़ने की स्थिति है। जानकारों का कहना है कि नदी में लू चलेगी। समस्या का समाधान तो बताया जाता है लेकिन नदी के किनारे हरित पटटी का विकास प्राकृतिक जल प्रवाह बनाए रखने प्रदूषण कम करने में सफल रहेगा यह अ च्छी बात है। इसलिए कह सकते हैं कि करोड़ों पेड़ जो हर साल लगाए जा रहे हैं और आधों का पत नहीं चलता इससे निपटने के लिए क्या ही अच्छा हो कि वृक्षारोपण अभियान नदियों के किनारे चलाकर ग्रामीणों को उनके रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाए। नदियों में गिरने वाले प्रदूषित जल को सख्ती से उनके नाले को नदी में गिरने से रोका जाए और पानी का साफ करने की व्यवस्था हो और जहां पाइप के द्वारा गंदा जल धरती में समाया जा रहा है उसके खिलाफ कार्रवाई हो। एसी प्रचलन रुकने वाला नहीं है लेकिन सरकारी कार्यालयों में एसी की संख्या में कमी की जा सकती है। अफसरों को एक ही हॉल में बैठाया जा सकता है जिससे एसी के प्रदूषण में कमी होगी। एक जानकारी अनुसार गंगा में बढ़ती गर्मी व घटती ऑक्सीजन चिंता का विषय बन गई है। इससे गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय जीवन और इस पर निर्भर करोड़ों लोगों की आजीविका पर खतरा बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन, कम बारिश, घटता जल प्रवाह, नदी किनारे हरियाली की कमी, ग्लेशियरों में सिकुड़न इसके प्रमुख कारण हैं।
    आईआईआईटी हैदराबाद के हाइड्रोक्लाइमेटिक रिसर्च ग्रुप और कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के शोध के अनुसार, गंगा के मध्य प्रवाह क्षेत्र में 2009 से 2025 के बीच पानी का औसत तापमान करीब 1.88 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। इससे पहले इस क्षेत्र में पारा बढ़ने की वार्षिक औसत दर 0.9 डिग्री सेल्सियस थी। आईआईआईटी हैदराबाद की वैज्ञानिक डॉ. रेहाना शैक ने जानकारी देते हुए बताया कि तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर पानी में ऑक्सीजन घुलने का स्तर 2.3श् तक घट सकता है। यह ऑक्सीजन मछलियों, जलीय कीटों और बाकी जीवों के लिए जीवनदायी होती है।
    क्या है नदी की लू
    जब नदी का पानी लगातार कई दिनों तक सामान्य से अधिक गर्म रहता है तो इसे श्रिवराइन हीटवेव्य या नदी में पड़ने वाली लू कहा जाता है। वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन मौजूदा गति से जारी रहा तो 2090 तक गंगा के आधे से अधिक हिस्से में श्लू्य की घटनाएं काफी बढ़ सकती हैं।
    कहने का आश्य सिर्फ इतना है कि पानी की निर्मलता बनी रहे तो उसमें पलने वाले जीव जंतु जो गंदगी खाकर स्वच्छ वातावरण बनाते हैं वो बचे रहेंगे।
    सबसे बड़ी बात प्रदूषण से फैलने वाली बीमारियां रुकेंगी और कुछ पैदल घूमने वालों की संख्या बढ़ने से दवाईयों का खर्च कम होगा। हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। आज विश्व सैर सपाटा दिवस पर कह सकता हूं कि सुबह घूमने वालों की संख्या जितनी बढ़ेगी उतनी खुशहाली जागरुकाता आए और सुधार होने की संभावनाएं मजबूत होंगी। सुबह शाम सैर करने वाले ग्रुप बनाकर घूमते हैं और उनमें बच्चों से बड़ों और हर विषय पर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण है जागरुकता बढ़ाने में उपयोगी है। किसी भी शहर में पार्क कॉलोनियों में घूमने वालों की टोलियां मिलेंगी और उनमें सकारात्मक चर्चा राजनीतिक सामाजिक धार्मिक क्षेत्रों को लेकर होती है।
    एक अच्छी शुरुआत देखने को मिल रही है। अब एक गाड़ी से कई लोग सफर कर रहे हैं और गांवों तक जाने के लिए बाइक टैक्सी कम पैसों में पहुंचा देती हैं। इसमें समाज भी प्रदूषण से बचा रहता है और आवागमन सही हो रहा है इसलिए इसे सरकार को बढ़ावा देना चाहिए।
    वरिष्ठ फिजीशियन डॉ तनुराज सिराही का कहना है
    वरिष्ठ फिजीशियन डॉ तनुराज सिराही का कहना है कि सुबह की सैर शरीर में शुगर का स्तर संतुलित रखती है। कॉलेस्ट्राल में कमी आती है। बीपी नियंत्रित रहता है। सुबह की सैर कैलोरी बर्न करने में आसान तरीका है। डॉ तनुराज सिराही जैसे हंसमुख और मिलनसार डॉक्टर शुगर और बीमारियों से पीड़ित लोगों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सुबह की सैर प्रदूषण से मुकाबला करने में आम आदमी का स्टेमिना बनाए रख सकता है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    भारत ने 2028-29 UNSC अस्थायी सदस्यता के लिए दावेदारी की पेश, जयशंकर ने दिया शांति का मंत्र

    July 14, 2026

    US-ईरान युद्ध : मार्च 2026 से अब तक खाड़ी इलाके में 13 भारतीयों की मौत, 3 लापता

    July 14, 2026

    ‘तुम्बाड 2’ में आलिया भट्ट के आने से फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट और बढ़ गई

    July 14, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.