मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने काम संभालने के बाद भ्रष्टाचार लापरवाही समाप्त करने का बीड़ा उठाया और उस पर वर्तमान में भी काम हो रहा है। आए दिन रिश्वत लेते और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वालों पर कार्रवाई हो रही है और कुछ अफसर समय से पहले सेवानिवृत कर दिए गए हैं लेकिन नागरिकों में चर्चा है कि विकास प्राधिकरणों और आवास विकास के भ्रष्टाचार में लिप्त कुछ इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अभी बीते दिनों मिर्जापुर में बाणसागर नहर निर्माण परियोजना में तीन करोड़ रुपये के काम का बिल पास करने के लिए एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में सागर कॉलोनी से जूनियर इंजीनियर मुसाफिर सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार किया जो सीबीआई ने सीएसआईआर आईटीआर में रहे सेक्शन ऑफिसर की पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलें में रिपोर्ट दर्ज की है तो लापरवाही करने पर जल जीवन मिशन के १२ इंजीनियर निलंबित किए गए और १४ पर विभागीय कार्रवाई व तबादला किया जा रहा है। यह कुछ ऐसे मामले हैं जो चर्चाओं में आजकल बताए जाते हैं। विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली की जानकारी रखने वाले नागरिकों का कहना है कि जब चारों तरफ कार्रवाई हो रही है तो मेरठ विकास प्राधिकरण के अवैध निर्माण रोकने से संबंधित अफसरों पर रहम क्यों। जानकारों का कहना है कि अगर इस विभाग के अफसरों के भ्रष्टाचार लापरवाही व सरकारी नीतियों के उल्लंघन के मामले देखने है तो सीएम पोर्टल पर जो शिकायतें होती है दो साल में नक्शा पास के नाम पर उनका निस्तारण करने में मामले जिन्हें समाप्त करने की कोशिश की गई है उनकी जांच करा ली जाए तो ज्यादातर अफसर व कर्मचारियों की भ्रष्ट कार्यप्रणाली का खुलासा हो सकता है।
हाल यह है कि नागरिक लिखित में शिकायत दे रहे हैं प्रदर्शन भी कर रहे हैं पर्यावरणविद डॉक्टर अनिल नौसरान ने साकेत के एक अवैध निर्माण के सबूत पेश किए और इसी तरह सरस्वती लोक कॉलोनी निवासी दशमीत सिंह एडवोकेट ने अवैध निर्माण की शिकायत की लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अफसरों ने नहीं की। जांच कराई जाए तो अनेको ऐसे मामले आएंगे जिनमें सरकारी जमीन घेरने कच्ची कॉलोनियां कटने और अवैध निर्माण की खबरें समाचारों में खूब रही लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उच्चाधिकारियों को गुमराह करने के लिए ध्वस्तीकरण की खबरें छपवाई जाती है लेकिन जांच कराई जाए तो अवैध निर्माण तोड़ने के नाम पर बड़ी कार्रवाई नजर नहीं आती है। इस बारे में सरदार जसमीत सिंह का कहना है कि वो मेडा के जोन प्रभारी अर्पित यादव के खिलाफ एफआईआर कराएंगे और इस अवैध निर्माण की श्रृखला को तोड़ने के लिए जन आंदोलन चलाया जाएगा। लेकिन सरकार की नीति के खिलाफ काम करने वाले मेडा के अफसरों पर कार्रवाई कराएंगे। कई नागरिकों का कहना है कि जांच कराने पर आय से ज्यादा संपत्ति और नियमों के खिलाफ काम कराने के मामले अर्पित यादव आदि के खुलकर सामने आ सकते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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