प्रदेश भर में कहीं ना कहीं सहकारी आवास समितियों में गडबड़ और घोटालों व हंगामों की खबरें पढ़ने सुनने देखने को मीडिया में पढ़ने को मिलती रहती है। इस बारे में जहां तक मौखिक चर्चा सुनाई देती है वो यह है कि सहकारी अधिकारी आवास के पद पर जो अफसर तैनात रहते हैं उन्हें सबकुछ पता होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई ऐसी शासन की नीति के तहत नहीं की जाती जिससे पारदर्शी वातावरण सहकारी आवास समितियों में बना रहे। इसका जीता जागता उदाहरण रामा सहकारी आवास समिति लिमिटेड द्वारा शताब्दी नगर की करीब १०० करोड़ से अधिक मूल्य की भूमि आवासीय जमीन के कथित बंदरबाट के मामले जो सामने आए हैं और उसके बारे में सहकारी अधिकारी आवास विवेक राय के कथन को देखा जा सकता है। क्योंकि आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने प्रदेश सरकार को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि अभय कुमार अजय गुप्ता तरूण गुप्ता सागर गुप्ता आदि की उक्त जमीन की बंदरबाट में मुख्य भूमिका है। क्योंकि समिति की विभिन्न कमेटियों में सभी बड़े पदों पर इन्हीं लोगों में से शामिल है। समिति की कुल तीन जमीनों में से ३६.१८ बीघा भूमि शताब्दीनगर आवासीय योजना में अधिकृत हुई जबकि अन्य जमीनें रक्षापुरम और काशी क्षेत्र में बताई जाती है। चर्चा है कि अधिग्रहण से मिली राशि से नई भूमि खरीदने की बजाय धन और जमीन को आपस में बांट लिए जाने काशी क्षेत्र की आवासीय भूमि को नियम के विपरीत औद्योगिक भू उपयोग परिवर्तन कराकर गैर सदस्यों को बेच दिया गया। लेकिन शिकायत होने के बाद भी अभी विवेक राय कह रहे हैं कि समिति के पदाधिकारियों से जमीन और वित्तीय लेनदेन के अभिलेख मांगे गए हैं जो अभी तक प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। जब प्राप्त होंगे तो जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। विवेक राय के कथन से लगता है कि अभी तक दस्तावेज उन्हें प्राप्त नहीं हुए और जब समिति सदस्यों की मर्जी होगी वो तब उपलब्ध कराए जाएंगे। इतने मामला कागजी कार्रवाई में फंसकर धूमिल हो जाएगा जैसा कि अन्य मामलों और संस्थाओं में कई बार होता रहा है। जबकि समिति के खातों में करोड़ों रूपये विकास कार्य और निवेश दिखाए गए है लेकिन ना तो कोई नई भूमि खरीदी गई और ना विकास कार्य धरातल पर दिखाई दिया। बताते हैं कि समिति ने खेती और लीज से आमदनी दर्शाई जबकि सहकारी आवास समितियों का कृषि से कोई लेना देना नहीं होता। मामले की गंभीरता को देखते हुए शहरी नियोजन विभाग के प्रदेश सचिव पी गुरूप्रसाद के आदेश पर स्थानीय सहकारी अधिकारी द्वारा जांच के आदेश तो दिए गए पर उसे पूर्ण करने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बताते चलें कि बीते दिनों एक जिला कलेक्टर ने अवैध निर्माण और भूमि के गलत उपयोग व नियमों का उल्लंघन करने वालों को भूमाफियाओं के रूप में चिहिन्त किए जाने की बात कही थी तो बीते दिनों विधानपरिषद की समीक्षा समिति की इसके सभापति कुंवर महाराज सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक विकास भवन मेरठ में हुई जिसमें स्पष्ट कहा गया कि भारी भरकम जुर्माना लगाकर अवैध कॉलोनी और व्यवसायिक निर्माण रोकें। तथा सरकार की निर्माण नीति के विपरीत हो रहे कार्यो के लिए विभागीय अधिकारियेां को फटकार भी लगाई गई। कुल मिलाकर सरकारी नियमों के अनुसार भूमि से संबंध अगर गडबड होती नजर आती है तो संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। और सहकारी आवास अधिकारी भी इससे अलग नहीं हो सकते। इसलिए मेरा मानना है कि रामा सहकारी समिति आवास लिमिटेड के जिम्मेदार पदाधिकारियों के साथ साथ सहकारी समितियों से जुड़े नियमों की अनदेखी करने के लिए सहकारी अधिकारी विवेक राय के खिलाफ जांच होनी चाहिए क्योंकि ऐसी समितियों में रोज ही कहीं ना कहीं गडबड होने और उन्हें रोकने में तैनात प्रशासकों और सहकारी आवास अधिकारी द्वारा लापरवाही बरते जाने की सूचनाएं और खबरें सुनने व पढ़ने को मिलती रही हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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