सुबह आठ से रात नौ बजे तक भारी वाहनों के शहरों में प्रवेश पर प्रतिबंध के बावजूद जितना सामान बड़े ट्रकों में नहीं आता उतना टै्रक्टर ट्रॉलियों और टेपों भरकर बाजारों में घूमते हैं और जाम लगाते हैं। इस बात से कोई अनभिज्ञ नहीं है। बड़े बाजारों के साथ छोटे मोहल्लों में भी यह छोटे ट्रक घूमकर व्यवस्था बिगाड़ते देखे जा सकते हैं मगर पता नहीं मीडिया में रोजाना दो व चार पहिया वाहनों का चालान करने का दावा करने वालों को यह मैजिक और टेपों ट्रक क्यों नहीं दिखाई देते। आम आदमी का मानना है कि जब तक इनके बाजारों में घूमने पर रोक नहीं लगेगी जब तक जाम से मुक्ति मिलने वाली नहीं है। इस बारे में अफसरों से कुछ कहना तो ठीक सा नहीं लगता है। मगर सांसद और विधायकों को यह सवाल सदन में उठाकर दुर्घटनाओं को रोकने व जाम से मुक्ति दिलाने के लिए भी अब जरूरी होता जा रहा है। बताते चलेें कि बड़ी ट्रॉलियां सामान से भरकर व जुगाड़ टेंपों इतना सामान लेकर घूमते हैं जिसे देखकर ताज्जुब होता है। मगर तिपहिया वाहन लोहे के गाटर लेकर पुलिस के सामने से निकलते हैं। इन्हें कोई नहीं रोकता। कार व बाइक को रोककर चालान किए जाते हैं जबकि इन जुगाड़ वाहनों पर कोई कागज नहीं होता। इन पर रहम और आम आदमी पर सितम किसलिए। मुझे लगता है कि डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी जैसे जुझारू जनप्रतिनिधियों कैंट विधायक अमित अग्रवाल, किठौर विधायक शाहिद मंजूर व शहर विधायक रफीक अंसारी को आगे आकर दो पहिया वाहनों के चालान रोकने से हो रहे उत्पीड़न को रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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