शहरों के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए हर स्तर पर काम चल रहा है। सरकार भरपूर बजट दे रही है और संबंधित विभागों के अधिकारी लंबे दावे करने से चूक नहीं रहे हैं लेकिन मेडा की आठ फीट ऊंची दीवार से कसेरुखेड़ा के नाले की सफाई ठप हो गई है। उसमें सिल्ट व कचरा जमा होने से पार्षद के अनुसार बरसात में मोहल्ले जलमग्र हो रहे हैं। इनका कहना है कि यहां मशीन तो क्या पैदल भी नहीं जा सकते। पार्षद के कथन और खबर का संज्ञान लेकर जनप्रतिधियों को इस बारे में मौका मुआयना करना चाहिए और आवश्यकतानुसार इस दीवार को हटावाया जाए और जो विकास के दावे किए जा रहे हैं उनकी डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी बिंदुवार समीक्षा कराईये और देखिये कि जो चौराहों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे उनकी क्या स्थिति है और नई योजनाओं के विकसित होने से पहले सभी सांसद और विधायकों को कमिश्रर के साथ बैठकर समीक्षा की जाए क्योंकि सरकार विकास के लिए पैसा दे रही है किसी का बैक बैलेंस बढ़ाने के लिए नहीं। कुछ सरकारी अफसरों के यहां धन मिलने की खबरें आती हैं वो ऐसे ही मामलों से तैयार होती हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत की पटरी पर लौटने के इरादे से मैदान में उतरेगी
- 10वीं में फेल होने पर भागा बेटा 30 साल बाद घर लौटा, बूढ़े माता-पिता से मिलकर फूट-फूटकर रोया
- श्रीलंका को भारतीय अंडर-19 टीम ने 211 रनों से हराया
- Samsung AI स्मार्ट चश्मे लॉन्च, अब रियल टाइम में ट्रांसलेट होगी बातचीत
- तलाक के एक महीने बाद ही मौनी रॉय को मिला नया ब्वॉयफ्रेंड
- टॉक्सिक में यश-तारा सुतारिया की रोमांटिक कैमिस्ट्री ने जीता दिल
- चंद्रवंशी भुर्जी समाज का वार्षिक सम्मलेन व भंडारा संपन्न हुआ
- दिल्ली लाठीचार्ज के विरोध में 28 को उत्तराखंड कूच का ऐलान
