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    Home»चुनाव»मतदान और चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं, अलग-अलग हैं दोनों
    चुनाव

    मतदान और चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं, अलग-अलग हैं दोनों

    adminBy adminApril 13, 2026Updated:April 13, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली, 13 अप्रैल (जा)। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बार फिर दोहराया कि वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक नहीं है। दोनों एक-दूसरे से अलग हैं और पूरी तरह कानून के तहत संचालित होते हैं।
    सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने राजस्थान में जिला दुग्ध संघों से जुड़े एक चुनावी विवाद पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस महादेवन द्वारा लिखे फैसले में कहा गया कि वोट देने का अधिकार व्यक्ति को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में सक्षम बनाता है, वहीं चुनाव लड़ने का अधिकार एक अलग अधिकार है, जिस पर योग्यता, अयोग्यता और अन्य शर्तें लागू की जा सकती हैं। अदालत ने ज्योति बसु बनाम देवी घोषाल (1982) और जावेद बनाम हरियाणा राज्य (2003) के पहले के फैसलों का हवाला भी दिया।
    सिर्फ जज को दोष न दें: सुप्रीम कोर्ट के जज अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने गत दिवस कहा कि भारत में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के लिए केवल जज को ही जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी अक्सर वकीलों की बहस और कानूनी प्रक्रिया के तरीके से प्रभावित होती है।
    अर्थव्यवस्था में कानूनी प्रणाली अहम : सीजेआई
    नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने गत दिवस कहा कि देश केवल पूंजी या नीति के जरिये से 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता है, बल्कि इसमें कानूनी प्रणाली की गुणवत्ता अहम कारक होगी। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यक्रम में बोलते हुए सीजेआई ने यह बात कही।

    Court Order Desh New Delhi tazza khabar tazza khabar in hindi Voting and contesting elections are not fundamental rights; the two are distinct.
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