विश्व प्रसिद्ध व सनातनियों की भावना से जुड़े अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में घपले घोटाले खुलकर आ रहे हैं इनके बारे में किसी ने सोचा नहीं था कि यहां भी ऐसा हो सकता है क्योंकि सभी पुराने भाजपा और संघ से जुड़े अच्छी छवि के लोग मंदिर की व्यवस्थाओं में लगे हैं। यही कारण था कि जब पूर्व सीएम अखिलेश यादव का एक बयान सामने आया और सही बात यही है कि किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसा हो सकता है। ज्यादातर का यही कहना था कि यह राजनीति से प्रेरित हो सकता है। मगर पहले दिन चढ़ावा प्रकरण में एसआईटी ने हेरफेर को लेकर छह कर्मचारियों से पूछताछ की और मंदिर में आठ घंटे गुजारे। खबरों के अनुसार मंदिर ट्रस्ट में हमेशा तीन सदस्य सक्रिय रहे। बाकी जानकारों के अनुसार मीटिंगों में जाते आते रहे । इस प्रकरण को लेकर अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक जगतगुरु स्वामी महेश्वरानंद ने रामजन्म भूमि तीर्थ स्थल ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उन्हें महासचिव पद से हटाने की मांग की। अयोध्या के राम मंदिर के कार्य विभाजन के लिए गठित पांच समितियों और ट्रस्ट के कार्यों की जांच कई स्तर पर उठ रही है। मीडिया में कुछ ना कुछ रोजाना नया खुलासा हो ही रहा है। बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने पांच फरवरी २०२० को गठित किया था १५ सदस्यीय ट्रस्ट जिसमें देश के नामी लोग प्रशासनिक लोगों को स्थान मिला था। खबर के अनुसार चंपत राय गोपाल राव से एसआईटी द्वारा पूछताछ के बाद कुछ दस्तावेज कब्जे में लिये तो चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी ने लगातार दूसरे दिन भी जांच की। इस मामले में चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू ने कहा कि अनिल मिश्रा पर था कैश का जिम्मा। ४० कर्मचारी दो शिफ्ट में करते हैं मंदिर में आने वाली नकदी की गणना। उनसे कुछ पूछताछ की जा रही है और अब जैसा बताया जा रहा है चढ़ावे की गिनती और रखरखाव के लिए नई व्यवस्था भी की जा रही है। कई लोगों का कहना है कि अब तक की जांच में लीपापोती हो रही है। सारे मामले का ठीकरा कर्मचारियों के सिर फोड़ने की तैयारी चल रही है। बताते चलें कि अभी तक ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ तहरीर दी गई है लेकिन उन पर खबर लिखे जाने तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। अब तक की जांच में बताया जा रहा है कि तीन तिकड़ी में स्थान भी बनी विवाद की जगह और संदिग्धों को बेसमेंट में रखा गया है। रोजाना १८ से २० लाख की गिनती हो रही थी। यह भी आरोप लग रहे हैं कि चढ़ावे के करोड़ों रुपये और हार चरण पादुका दो किलो सोने की गदा और आभूषण कहां गए। सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराने की मांग उठ रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि राम मंदिर चढ़ावे की लूट हुई। वर्ष २०२१ से अब तक के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे है और मामला इतना बड़ा है इसलिए खुलकर सामने भी आएगा। भले ही कोई कह ले कि लीपापोती हो रही है। दानपात्र की गिनती के समय हेराफेरी के कई राज कार्यालय प्रभारी ने खोले हैं। १९ को सीएम योगी अयोध्या जा सकते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि ड्राइवर टिन्नू के घर से करोड़ों का सोना और १२५० ग्राम की शिलाएं बरामद हुई उसका भी खुलासा होना चाहिए क्योंकि एसआईटी की जांच शुरु होते ही नए दावे सामने आ रहे हैं। इस मामले के शुरु होते ही लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस व वित्त विभाग के सचिव नीलरत्न द्वारा बीते दिनों सांध्य आरती में हिस्सा लिया गया। अखिलेश यादव की इस मांग पर कि घोटाले का कोई भी दोषी बख्शा ना जाए अब तक की जांच में १०० से ज्यादा लोगों से पूछताछ हो चुकी है। जिसमें खुलकर आ रहा है कि चढ़ावे की गिनती में अनिल मिश्रा और टिन्नू की महत्वपूर्ण भूमिका थी। एक खबर के अनुसार इस प्रकरण में हाईकोर्ट में १८ को होगी सुनवाई लेकिन लोगों का कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का यह कथन कि मातम करने वाले चढ़ावे की चिंता ना करे सही नहीं है क्योंकि कोई मातम करे या कुछ और लेकिन मंदिर के दान की बंदरबाट सही नहीं कह सकते। मुझे लगता है कि उच्च स्तर पर इसमें दोषियों को बचाने के लिए कोई प्रयास भी नहीं होंगे। मंदिर की दानपेटी में हेरफेर दुखद हैं। मैं पहले भी कहता रहा हूं कि धर्मस्थलों के दान को देश के विकास आम आदमी की समस्या के समाधान और गरीबों के उत्थान में लगाया जाए। भगवान के मंदिर में तो यह आता ही रहेगा। लेकिन इसका सही उपयोग तभी होगा जब जनहित में हो इसका इस्तेमाल। ऐसा भी हो सकता है कि चढ़ावे का कुछ हिस्सा मंदिर की देखभाल के लिए रखा जाए और बाकी सब एक कमेटी बनाकर प्रदेश सरकारों व केंद्र सरकार को सौंपा जाए जो अच्छे कामों में लगकर नागरिकों के काम आए।
वैसे तो हमेशा ही धर्मस्थलों पर चढ़ावे को लेकर विवाद की घटनाएं सुनने को मिलती रही है लेकिन पिछले कुछ सालों में नामचीन धार्मिक स्थानों में सोना चांदी और पैसे में घपले और प्रसाद में प्रतिबंधित सामग्री मिलाने की खबरें सामने आई है और अब अयोध्या के राम मंदिर का मामला उजागर हुआ है। इसे ध्यान में रखते हुए मेरा मानना है कि देश के सभी धार्मिक स्थलों पर आए चढ़ावे का देश के विकास और जनहित में उपयोग शुरु हो जिससे यह घपले होने की संभावनाएं ही समाप्त हो जाएं। मंदिर ही क्या धार्मिक आयोजन कराने वाले संगठनों द्वारा लिए जाने वाले चंदे और खर्च की समारोह के बाद पूर्ण समीक्षा कराई जाए जिससे कोई नया विवाद पैदा ना हो सके।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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