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    Home»न्यूज़»गरम होता समुद्र का पानी प्रदूषित होती हरनंदी, काली नदी को स्वच्छ रखने हेतु देवप्रिया जैसे कारखाने बंद कराए जाएं
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    गरम होता समुद्र का पानी प्रदूषित होती हरनंदी, काली नदी को स्वच्छ रखने हेतु देवप्रिया जैसे कारखाने बंद कराए जाएं

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comFebruary 27, 2026No Comments53 Views
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    नदियों की सफाई और पुराने स्वच्छ रूप में लाने के लिए देशभर में जितने प्रयास हो रहे हैं मुझे लगता है कि ज्यो ज्यो दवा की मर्ज बढ़ता ही गया कहावत के समान नदी प्रेमियों और सरकार व आम आदमी की यह भावना मुझे लगता है पिछले कई दशक से सिरे नहीं चढ़ पा रही है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा नदियों की स्वच्छता और संरक्षण के लिए अथक प्रयास किए जा रहे हैं तो जल प्रेमी संगठनों द्वारा भी इस बारे में की जा रही कोशिशें कम नहीं है। मगर हमारी यह कोशिश कामयाब क्यों नहीं हो रही यह विषय सोचने विचार करने का है। जल ही जीवन है स्लोगन को आत्मसात कर इस बारे में मुझे लगता है कि हर व्यक्ति को तालाब, गांवों के ढहरों, नदियों को जीवित और स्वच्छ रखने के प्रयास करने की आवश्यकता है।
    एक खबर के अनुसार समुद्र का पानी गर्म होने लगा है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है। और भविष्य में जो इसके खतरनाक परिणाम सामने आएंगे अगर ध्यान से सोचा जाए तो वो आज भी आत्मा को कंपा देते हैं क्योंकि प्रदूषण फैलाने वाले माध्यमों को समाप्त करने वाले जीव जंतुओ के समक्ष तो परेशानी है ही आम आदमी की आजीविका पर भी जो समुद्री जीवों से अपना पेट भरते हैं उनके सामने रोजी रोटी का संघर्ष हो रहा है। धरती को जो खतरा है वो किसी से छिपा नहीं है। इस क्षेत्र के वैज्ञानिकों द्वारा एक अध्ययन १९९३ से २०२१ के बीच किया गया वो काफी चिंताजनक है। एक जमाने में प्यास बुझाने और खेती का माध्यम बनी हरनंदी सहारनपुर की शिवालिक श्रृंखला से निकलकर गौतमबुद्धनगर बागपत गाजियाबाद आदि में प्रवेश करती है उसके लिए गोमती रिवर फ्रंट की तरह विकसित करने का प्रयास होना था जो नहीं हुआ। लेकिन सहायक नदियों का प्रदूषण ढोने के चलते यह भी अब प्रदूषित होने लगी है। एक खबर पढ़ने को मिली कि काली नदी के पुनरउद्धार की योजना बननी चाहिए। सवाल उठता है कि कब तक पुनरउद्धार पर कब तक धन खर्च और काली नदी अपने पुराने स्वरूप में जाती रहेगी। इस पर विचार कर मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री केंद्र सरकार व प्रदेश सरकारों को नदियों के संरक्षण व उन्हें स्वच्छ बनाने के लिए निर्धारित नीतियों के अनुसार काली नदी हो या कोई और जितने भी किसी प्रकार का प्रदूषण फैलाने नदी में छोड़ने वालें उद्योगों को बंद कराना चाहिए। इससे भी बड़ी आवश्यकता है कि नाले नालियों का पानी और कबाड़ हमारे लालच और बजट अपनी सुविधाों पर खर्च करने की सोच में बदलाव के साथ साथ नदियों की सफाई के फर्जी आंकड़े देने वाले अफसरों की कार्यप्रणाली पर अंकुश लगाया जाए। काली नदी के उदगम स्थल सहारनपुर के बिहारीगढ़ से होकर यह जहां से गुजर रही है इसके किनारे लगे उद्योगों को बंद कराया जाए। बताते चलें कि २०१५ में इसे मृत नदी घोषित किया जा चुका है। कुछ साल पहले इसकी सफाई के नाम पर सरकार और नागरिकों का काफी पैसा खर्च हुआ था लेकिन फिर यह पुरानी स्थिति में पहुंच गई लगती है शायद इसलिए मेरठ के जिलाधिकारी डॉ वीके सिंह ने जल की स्वच्छता का मानव जीवन में महत्व ध्यान रखते हुए काल ीदी के पुर्नद्धार के निर्देश दिए हैं। यह काम १५ दिन में पूरा करने को कहा है। मैं उद्योगों के विकास को नहीं नकार रहा। रोजगार और प्रगति में उद्योगों का योगदान है लेकिन जीवन और जल की आवश्यकता से ज्यादा यह नहीं हो सकते। इसलिए मुझे लगता है कि मवाना रोड स्थित देवप्रिया पेपर मिल जैसे उद्योगों का प्रदूषित पानी नदी में ना गिराने की बात करते हों लेकिन देवप्रिया जैसे पेपर मिलों को यहां से हटाकर काली नदी के पास को ग्रामीणों को स्वस्थ जीवन का उपहार देने के लिए बंद कराया जाए। यह सबसे बड़ी आवश्यकता कही जा सकती है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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