मुजफ्फरनगर 26 फरवरी। नगर कोतवाली पुलिस ने मुजफ्फरनगर सहारनपुर स्टेट हाईवे पर रोहाना टोल प्लाजा पर रिफ्लेक्टर लगाकर वाहन चालकों से ठगी करने वाले गिरोह को पकड़ा है। आरोपित स्वयं को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ( एनएचएआइ) के परिवहन विभाग के अफसर बताकर लोगों से ठगी करते थे। बस और ट्रकों पर प्रति रिफ्लेक्टर 400 रुपये, कार एवं हल्के वाहनों से 200 रुपये वसूलते थे। गिरोह एक साल से सक्रिय था। 22 फरवरी को सहारनपुर में भी ठगी की थी।
बुधवार को पुलिस लाइन के सभागार में हुई पत्रकार वार्ता में एसपी सिटी सत्य नारायण प्रजापत ने बताया कि मंगलवार शाम को नगर सूचना मिली थी कि कुछ लोग मुजफ्फरनगर- सहारनपुर राज्य हाईवे (59) पर वाहन चालकों से ठगी कर रहे हैं। पुलिस ने इनकी घेराबंदी कर सरगना वरुण खोखर निवासी चाणक्य मार्ग शाहदरा थाना वेलकम दिल्ली समेत आठ को गिरफ्तार कर लिया।
इनके पास से मिली अर्टिगा कार (यूपी-11 सीटी-0623) पर भारत सरकार लिखा था। गिरोह हाईवे पर टोल प्लाजा के रोहाना कट के पास खड़े होकर वाहन चालकों को रोककर जांच और रिफ्लेक्टर लगाने के नाम पर वसूली कर रहा था। आरोपित स्वयं को एनएचएआइ के अधिकारी बताते थे, जिससे वाहन चालक इनके दबाव में आकर रुपये दे देते थे। यह गिरोह पिछले एक साल से सक्रिय था। 22 फरवरी को सहारनपुर जनपद में भी इसी तरह अवैध वसूली कर चुका है।
पुलिस ने अर्टिगा कार के अलावा, गिरोह के कब्जे से 133 लाल, पीली, नीली पर्चियों के अलावा विभिन्न रंग की 76 रिफ्लेक्टर टेप और सफेद पर्ची, दो बाडी बेल्ट रिफ्लेक्टर समेत बरामद 52,690 की नगदी जब्त कर ली है।
ये आरोपित हुए गिरफ्तार
पुलिस ने गिरोह के सरगना दिल्ली के शाहदरा निवासी वरूण खोखर हापुड़ के पिलखुआ क्षेत्र के अनवरपुर निवासी धीरेन्द्र सिंह बागपत के दाहा निवासी गुलवीर राणा, पिलाना निवासी शिवदीप त्यागी, गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के नानू मझोला निवासी मगेशपाल पाल, मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र के न्यू सैनिक विहार कालोनी निवासी विजय कुमार, मुजफ्फरनगर के इंद्रा कालोनी निवासी गौरव कुमार और सहारनपुर के फतेहपुर क्षेत्र हलबाना निवासी अनुज कुमार को गिरफ्तार किया है।
एसपी सिटी सत्य नारायण प्रजापत का कहना है कि आरोपित बसों और ट्रकों को रोककर रिफ्लेक्टर की जांच करते थे। बिना रिफ्लेक्टर के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में प्रवेश नहीं मिलने की चेतावनी देकर बस और ट्रकों पर प्रति रिफ्लेक्टर 400 रुपये तथा कार एवं हल्के वाहनों से 200 रुपये वसूलते थे। हालांकि कुछ वाहनों से सीधे वसूली कर उन्हें आगे चलता कर देते थे। साथ ही यूपी की फर्जी मुहर वाली सड़क सुरक्षा के नियम लिखे पत्र देते थे।

