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    Home»देश»होम्योपैथी चिकित्सा दिवस, डा0 ईश्वर सिंह जैसे चिकित्सकों की काबिलियत के चलते देश दुनिया में लोकप्रिय हो रही है होम्योपैथी चिकित्सा
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    होम्योपैथी चिकित्सा दिवस, डा0 ईश्वर सिंह जैसे चिकित्सकों की काबिलियत के चलते देश दुनिया में लोकप्रिय हो रही है होम्योपैथी चिकित्सा

    adminBy adminApril 10, 2026No Comments8 Views
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    वर्तमान समय में होम्योपैथ चिकित्सा पद्धति निरंतर लोकप्रिय हो रही है भले ही अभी इस व्यस्था से इलाज करने वाले डाक्टरों की संख्या देश में एलोपैथी चिकित्सकों से कम हो लेकिन एक अनुमान के अनुसार कई लाख चिकित्सक देश के बड़े बड़े शहरों के साथ ही गांव देहातों के साथ ही इस अचूक होम्योपैथिक दवा से इलाज कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि जहां एलोपैथिक दवाईयां कई प्रकार के कैमिकल आदि भी उपयोग होते हैं लेकिन होम्योपैथी प्राकृति श्रोतों आदि से बनती है और यह बीमारी को जड़ से समाप्त करती है एक बार बीमारी सही हुई तो दवाईयां भी बंद कर दी जाती है कोरोना काल में होम्योपैथी दवाई कारगर साबित हुईं और इसके चिकित्सकों ने गरीब अमीर और हर वर्ग के मरीजों को दवाई देने और ठीक करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताते है कि यूनानी दो शब्द होमो (समान) और पैथोस (दुख) से मिलकर बनी इस पद्धति से तमाम जगहों पर इलाज चल रहा है। और देशभर में प्राइवेट चिकित्सकों के साथ-साथ सरकारी डिस्पेंसरी और अस्पतालों में भी होम्योपैथिक चिकित्सक मौजूद हैं और जरूरतमंदो को अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
    एक समय था जब मेरठ के बेगमपुल पर डाक्टर ईश्वर सिंह का क्लीनिक मरीजों से भरा रहता था और कई बार तो बड़े-बड़े एलोपैथिक के चिकित्सों और नामचीन नेता और प्रशासनिक अधिकारी भी इनके क्लीनिक पर दिखाई दिया करते थे। वर्तमान में व्योवृद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक उस समय दुनिया के कई देशों की यूनिवर्सिटी में जाकर होम्योपैथी पर अपने विचार रखने और इसके बारे में लोगों को विस्तार से बताने का कार्य करते थे यह कह सकते हैं कि डा0 ईश्वर सिंह ने होम्योपैथी चिकित्सा को सभी में लोकप्रिय बनाने और इसकी प्रतिष्ठा बढाने का काम भी किया। डा. ईश्वर सिंह का कहना रहता था कि होम्योपैथी चिकित्सा में कैंसर एड्स और अन्य गम्भीर बीमारियों की चिकित्सा में कारगर हों उन बिन्दुओं पर भी काम हो रहा है और कई मरीज ऐसी बीमारियों के ठीक भी हुए हैं। वैसे यह होम्योपैथिक चिकित्सा भी एलोपैथी की तरह ही तुरंत असर करती है। यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है भ्रम फैलाने वाले कुछ भी कहते फिरे। डा0 ईश्वर सिंह का स्पष्ट कहना है कि पथरी, गठिया, पीलिया, मानसिक रोग, स्त्री रोग बच्चों की पेट संबंधित बीमारियों के साथ ही डेंगू और कोरोना काल में भी यह दवा काफी असरदार रही। यह जरूर है कि दवा खाने से पहले और बाद में लगभग आधे घंटे प्याज आदि ना खाई जाये तो यह तुरंत असर करना शुरू करती है। गोलियों को स्पर्श से बचाये रखना चाहिए इसे कभी भी खाने से पहले हाथ की हथेली पर ना लें और खा लें। इसे ठंडी और छाव वाली जगह पर रखें। समय का अंतराल दवा लेने के 30 मिनट पहले और बाद तक कुछ भी ना खाये। यह भी बताते हैं कि होम्योपैथी दवा को अन्य दवा के साथ ना मिलायें।
    आज हर वर्ष 10 अप्रैल को मनाये जाने वाले होम्योपैथी दिवस के उपलक्ष्य में इससे संबंधित डाक्टरों का अनेकों स्थानों पर सम्मान हुआ और उनकी इस क्षेत्र में काबिलियत को तो मुझ जैसे बहुत लोग प्रणाम करते हैं।
    बताते चले कि एक समय जब जेब में पैसे और खाने को रोटियां नहीं थी तब बड़ी से बड़ी बीमारी का ईलाज मेरठ के ढोलकी मोहल्ले में बैठने वाले होम्योपैथी चिकित्सक की 25 पैसे की दवाई पूरी तौर पर ठीक कर देती थी। उसके बाद देश के जाने माने होम्योपैथिक चिकित्सक डा0 ईश्वर सिंह से सम्पर्क हुआ सरल स्वभाव के लेकिन अपने फन में माहिर डा0 ईश्वर सिंह। मैं बता दूं कि एक बार मेरे हाथों में बहुत भयंकर एलर्जी हुई जिसके चलते और की तो बात दूर मुझे खुद अपने हाथों से एक घृणा सी हो गयी थी लेकिन तीन महीने की चिकित्सा के उपरांत वह पूरी तरह ठीक हो गयी और आज 25 साल होने के बाद भी मैं उस बीमारी से मुक्त हूं भगवान की मेहरबानी और डाक्टर साहब की दवाई के कारण।
    होम्योपैथिक दवा के असर का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि एक बार मैं लगभग 40 साल पहले नैनीताल गया जहां मुझे पथरी का दर्द इतना हुआ कि मुझे आधा घंटे बाद ही वहां से भागना पड़ा कि मेरठ जाकर ऑपरेशन कराऊ। क्योंकि यह पथरी का दर्द समय बेसमय उठता था लेकिन डा0 ईश्वर सिंह से मिलकर जब बताया तो उन्होंने कहा कि ऑपरेशन और सही होने में भी समय लगेगा चार दिन यह गोलियां खाओं आपको ताज्जुब होगा कि होम्योपैथी की मीठी गोलियों ने ऐसा असर दिखाया उसके बाद लगभग 4 दशक से मुझे पथरी का दर्द नहीं उठा। इसी प्रकार से मेरा बेटा अंकित बिश्नोई जब एक साल का था तो उसका बुखार नहीं उतर रहा था डाक्टर साहब विदेश गये हुए थे उनके पुत्र उमंग लाबा जो अमेरिका में हार्ट स्पेशलिस्ट है क्लीनिक पर मौजूद थे दिखाने पर उन्होंने आठ पुड़िये गोलियों की बना कर दी और आपको ताज्जुब होगा कि चार दिन में वह भलेचंगे हो गये कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि होम्योपैथी का असर एलोपैथी से कम नहीं होता है मेरे हिसाब से कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि यूपी के मेरठ में डा0 ईश्वर सिंह ने होम्योपैथिक चिकित्सा को समाज के हर वर्ग में एक नयी पहचान दी जिसकी चर्चा देश-विदेश में खूब हुइर्क।
    इससे पूर्व डा0 चौधरी और बालों वोले होम्योपैथ डा0 और वर्तमान में वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डा0 रजनीश भारद्वाज, चिकित्स डा0 राजेन्द्र सिंह, डा0 अनिल कुमार वशिष्ठ, डा0 दिनेश शर्मा का नाम काफी प्रमुखता से पिछले एक दशक से लिया जाता हैक्र शायद पुराने लोगों को याद हो कि मेरठ तहसील में एक डाक्टर अस्थाना रहा करते थे जो आज नहीं है लेकिन उनकी काबिलियत और होम्योपैथिक चिकित्सा पर इतनी पकड़ थी वह नाड़ी देखकर बीमारी बता देते थे और मरीज उससे सही भी होते थे।
    होम्योपैथी चिकित्सा के असर का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अगर कुछ आम आदमी के प्रति सरल सोच रखने वाले इसके चिकित्सकों 10, 20 या 50 रुपये दवाई देते हैं और मरीज ठीक होते देश में कितने ही ऐसे चिकित्सक भी है जो एलोपैथी कि चिकित्सकों से ज्यादा देखने की फीस लेते हैं।
    औरों के बारे में तो मैं नहीं कहता मगर वर्तमान समय में डा0 तनुराज सिरोही, डा. एमके बंसल, डा0 सरोजिनी अग्रवाल आदि की काबिलियत का मैं पूरी तौर पर मानने वाला हूं मगर होम्योपैथी चिकित्सा में मेरा और मेरे परिवार का आज भी पूरा भरोसा बना हुआ है। मेरा बेटा कबीर जो मुंबई में रहता हैं और फिल्म इंडस्ट्री से संबंध है वह होम्योपैथ और आयुर्वेद चिकित्सा को ही हर बीमारी में प्राथमिकता देता है। लेकिन यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि आवश्यकता पड़ने और परेशानी होने पर एलोपैथी की दवाईयों का उपयोग करने में समयानुकूल हर्ज नहीं है क्योंकि किसी भी चिकित्सा पद्धति को नकारा नहीं जा सकता। आज होम्योपैथी चिकित्सा दिवस के शुभ मौके पर मैं और मेरा परिवार सभी होम्योपैथिक चिकित्सकों और इस चिकित्सा पद्धति में विश्वास रखने वालों सभी को यह बधाई देते हुए आग्रह करता हूं कि समय अनुसार होम्योपैथी काफी असरदार दवाई है उसको एक बार आजमाना जरूर चाहिए। पूर्व में यह जर्मन से आती थी तो काफी महंगी हुआ करती थीं लेकिन अब अपने देश में काफी उच्चस्तरीय होम्योपैथी दवाई का उत्पादन हो रहा है और इसके चाहिने वालों की संख्या ग्रामीण कहावत दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती ही जा रही है जो इस बात का प्रतीक है कि गम्भीर से गम्भीर बीमारियों का इलाज डा0 ईश्वर सिंह जैसे अनुभवी और नए क्रचिकित्सकों के द्वारा किया जा रहा है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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